कुशीनगर में सड़क हादसे में युवक की मौत:इलाज के दौरान तोड़ा दम, जिला अस्पताल से एम्स हुआ था रेफर

कुशीनगर के हनुमानगंज थाना क्षेत्र के नरकहवा स्कूल टोला निवासी 22 वर्षीय सरतेज कुशवाहा की गुरुवार सुबह एम्स अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। सरतेज बुधवार दोपहर एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनकी शादी 6 फरवरी 2026 को तय थी और घर में तैयारियां चल रही थीं। सरतेज बुधवार दोपहर करीब 3 बजे बेलवनिया से अपनी बाइक पर सीमेंट का एक बोरा लादकर घर लौट रहे थे। नरकहवा गांव के समीप छठ वेदी के पास उनकी बाइक अनियंत्रित हो गई। वे सड़क पर गिरकर छठ वेदी से जा टकराए, जिससे उनके सिर पर गंभीर चोट आई थी। हादसे के बाद परिजनों ने घायल सरतेज को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया। परिजनों का आरोप है कि वहां डॉक्टरों ने बिना आवश्यक जांच किए उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने भी आगे पीजीआई लखनऊ भेजने की सलाह दी। इसके बाद परिजन उन्हें बेहतर उपचार के लिए एम्स ले गए। एम्स में इलाज के दौरान गुरुवार सुबह करीब 9 बजे सरतेज कुशवाहा ने दम तोड़ दिया। सरतेज अपने पांच भाइयों में चौथे नंबर पर थे। वह गुजरात के अहमदाबाद में एक फाइबर कंपनी में कार्यरत थे, लेकिन पिछले पांच माह से पिता की खराब तबीयत के कारण घर पर रहकर खेती में मदद कर रहे थे। मृतक के पिता गनेश कुशवाहा ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में जांच मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद कोई जांच नहीं की गई। उनके अनुसार, स्वास्थ्यकर्मियों ने ऑपरेटर न होने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि यदि जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त संसाधन होते, तो उनके बेटे की जान बचाई जा सकती थी। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि इमरजेंसी में स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं था और बेहोश घायल को तीन-चार लोग गोद में उठाकर एम्बुलेंस तक ले गए। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में गंभीर मरीजों का इलाज नहीं हो रहा है और डॉक्टर सीधे गोरखपुर रेफर कर दे रहे हैं। इमरजेंसी में अधिकतर जूनियर या बाल रोग विशेषज्ञ तैनात रहते हैं, जिससे दुर्घटना के गंभीर मरीजों का उपचार मुश्किल हो जाता है। इस दुखद घटना से परिवार में कोहराम मचा हुआ है और पूरे गांव में शोक की लहर है।