KGMU में नई तकनीक से स्टोन के मरीजों का इलाज:बिना चीरा लगाए किडनी से निकलेगी पथरी, ‘रेट्रोग्रेड इंट्रारेनल सर्जरी’ से होगा ट्रीटमेंट

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) में बिना चीरा किडनी की पथरी निकालने की सुविधा शुरू हो गई है। यूरोलॉजी विभाग में रेट्रोग्रेड इंट्रारेनल सर्जरी तकनीक से कई ऑपरेशन किए जा चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस तकनीक से मरीजों की रिकवरी कम समय में संभव हो सकेगी। सेफ प्रोसिजर से निकलेगी पथरी यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अपुल गोयल ने बयाया कि रेट्रोग्रेड इंट्रारेनल सर्जरी (RIRS) गुर्दे की पथरी निकालने की एक न्यूनतम आक्रामक प्रक्रिया है। परंपरागत तकनीक में पथरी निकालने के लिए किडनी में चीरा लगाना पड़ता है। इस वजह से छोटी पथरी निकालने के बजाय लोग इसे अनदेखा करते रहते हैं। ऐसे में RIRS तकनीक काम आती है। इस तकनीक में एक लचीले एंडोस्कोप को मूत्रमार्ग और मूत्राशय के माध्यम से गुर्दे तक पहुंचाया जाता है। इसमें कोई चीरा नहीं लगाना पड़ता है। इसके बाद पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने के लिए लेजर या अन्य उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है। इन टूटे टुकड़ों को प्रेशर के साथ बाहर खींच लिया जाता है। इसके साथ ही पेशाब को निकालने के लिए एक अस्थायी स्टेंट लगाया जा सकता है। दो सप्ताह बाद इसे निकाल दिया जाता है। नेवी में जाने के लिए मिला प्रमाणपत्र डॉ.अवनीत गुप्ता ने बताया कि इसी महीने नेवी में काम करने वाले व्यक्ति की सर्जरी की गई। उनकी किडनी में तीन मिलीमीटर की पथरी थी। छोटी पथरी की वजह से उनको चीरा नहीं लगाया जा रहा था। समस्या यह थी कि पथरी होने से उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहा था। इस तकनीक से उनकी सर्जरी की गई और पथरी निकाल दी गई। अब वे अपनी नौकरी पर चले गए हैं। कम होगा ब्लड लॉस इस प्रक्रिया में खून बहुत कम बहता है। इसकी वजह से जटिलताएं कम होती हैं। मरीज जल्द ही अपने काम पर लौट आता है।