पीलीभीत और एटा से रेस्क्यू करके लाई गई दो बाघिनों का कानपुर जू के इंडोर वार्ड मे रहते हुए लंबा समय बीतने के बाद भी व्यवहार नहीं बदला है। इनका व्यवहार गुस्सैल और जिद्दी बताया जा रहा है। विशेषज्ञ इनके व्यवहार को समझने का प्रयास कर रहे हैं। इन दोनों को दर्शकों के लिए बाड़े में छोड़ा गया था। जहां पर इन दोनों का रवैया अड़ियल रहा। कभी खाना नहीं खाया तो कभी एक स्थान से काफी लंबे समय तक नहीं हिली। जू प्रशासन ने इन दोनों को दोबारा अस्पताल के इंडोर वार्ड में क्वारंटीन कर दिया है। यह दोनों अभी भी किसी के नजदीक जाने पर गुस्सा करती व गुर्राती हैं। पीलीभीत में पांच का किया था शिकार पीलीभीत से लाई गई बाघिन ने वहां पांच लोगों का शिकार किया था। पीलीभीत व एटा से लाई गई बाघिन का चिड़ियाघर के बाड़े में रहने के दौरान व्यवहार चिंताजनक रहा।उनके इस असामान्य व्यवहार के चलते उन्हें बाड़े से निकालकर वापस इंडोर वार्ड में लाना पड़ा। चिडिय़ाघर के डॉक्टरों के अनुसार क्वारंटीनक्षेत्र में कुल एक बाघ, तीन बाघिन और दो तेंदुए हैं। इनमें सीतापुर का आदमखोर बाघ और बिजनौर का आदमखोर तेंदुआ भी शामिल हैं। सभी जानवरों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। ढलने में लगता समय चिड़ियाघर के अधिकारियों का कहना है कि जंगल से आदमखोर के रूप में पकड़े गए इन जानवरों को चिड़ियाघर के माहौल में ढलने में काफी समय लगता है। उनके व्यवहार में अनिश्चितता बनी रहती है। विशेषज्ञों की एक टीम लगातार उनकी गतिविधियों और मानसिक स्थिति पर नजर रखे हुए है। इन बाघिनों के व्यवहार में सुधार के लिए विशेष देखभाल और प्रबंधन के तरीके अपनाए जा रहे हैं। हालांकि, अब तक उनका ‘गुस्सैल’ रवैया बरकरार है।