सपा प्रमुख अखिलेश यादव शनिवार को अचानक आगरा के फतेहपुर सीकरी पहुंचे। सूफी गायन के बीच उन्होंने शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पर चादर चढ़ाई। पत्नी डिंपल यादव और राज्यसभा सांसद जया बच्चन भी साथ रहीं। तीनों ने अलग-अलग रंग की चादरें चढ़ाईं। एक- ग्रीन, दूसरी- ब्लू और तीसरी- ग्रीन-ब्लू मिक्स। फिर मजार पर फूल चढ़ाए। दरगाह में मन्नत का धागा बांधा और दुआ की। इसके बाद दरगाह की नक्काशी देखी। डिंपल ने नक्काशी के बारे में बारीकी से खादिम अनवर कुरैशी से समझा। नक्काशी की जमकर तारीफ की। कहा- जिस तरह की ये कारीगरी है, आज ऐसा होना नामुमकिन है। अखिलेश का फतेहपुर सीकरी आने का प्रोग्राम अचानक ही बना। अखिलेश और डिंपल फतेहपुर सीकरी से सड़क मार्ग से सैफई के लिए निकले। वहीं, जया बच्चन खेरिया एयरपोर्ट से मुंबई के लिए रवाना हुईं। बता दें, 13 साल पहले सितंबर, 2012 में अखिलेश मुख्यमंत्री रहते हुए शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पहुंचे थे। चादर चढ़ाई थी, साथ ही मन्नत का धागा भी बांधा था। पहले 3 तस्वीरें देखिए- पढ़िए, अखिलेश ने मीडिया से बातचीत में क्या कहा 1- ये दरगाह लोगों के जीवन में खुशहाली लाने की जगह
दरगाह पर चादरपोशी को लेकर अखिलेश ने कहा- ये हमारे हिंदुस्तान की सबसे बड़ी पहचान है। यहां सभी जाति-धर्म के लोग साथ रहते हैं। मैं देख रहा हूं कि यहां कोई विदेश से आया है, कोई भारत के दूसरे हिस्से से आया है। ये बहुत सारे लोगों के जीवन में खुशहाली लाने की जगह है। बहुत से लोग यहां से जीवनयापन कर रहे हैं। 2- SIR के बहाने BJP वोट काटना चाहती है
अखिलेश ने कहा- मान लीजिए अगर संविधान नहीं होगा तो आरक्षण नहीं होगा। संविधान कमजोर होगा तो हमारा लोकतंत्र कमजोर होगा। तमाम वो लोग लोकतंत्र को कमजोर करना चाहते हैं जो एकत्रंत्रिय लोग हैं। मन विधान से चलना चाहते हैं, संविधान से नहीं चलना चाहते। कहा- आज जब SIR चल रहा है, तो हमें न सिर्फ वोट बनवाना है, बल्कि वोट कटने से बचाना है, वोट जोड़ना है। SIR के बहाने ये (BJP) वोट काटना चाहते हैं। ये तो पहली बार सुनने को मिल रहा कि संविधान से बनी संस्था वोट बनवाने से ज्यादा वोट कटवाने की चिंता कर रही। मैं तो कहूंगा कि एक-एक नागरिक को जागरूक होकर वोट बनवाना चाहिए। अगर वोट नहीं बनेगा तो हमारा लोकतंत्र कमजोर होगा। 3- हमने भाजपा से समीकरण बनाना सीखा
अखिलेश ने कहा- इस बार समीकरण बदलेंगे। पिछली बार आप जानते हो कि भरोसा कहां किया था। इस बार भरोसा कम और काम ज्यादा होगा। जब हम लोग काम ज्यादा करेंगे तो समीकरण बनेंगे। हम लोगों ने भाजपा से समीकरण बनाना सीखा है। समीकरण बनाकर जो जनता की सेवा करना चाहेगा, हम उसी को मौका देंगे। इस बार आगरा सपा के पक्ष में ऐतिहासिक परिणाम देगा। आगरा में जो मेट्रो चल रही, वह सपा सरकार की देन है। आगरा के लोग अगले चुनाव में सपा के पक्ष में वोट करेंगे। डबल इंजन की सरकार आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से अच्छी सड़क नहीं बना पाई। खबर में आगे बढ़ने से पहले इस पोल पर अपनी राय दीजिए…
4- संविधान PDA के लिए किस्मत की किताब
अखिलेश ने कहा- आज जहां हम SIR की चर्चा कर रहे, वहीं बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी को भी याद कर रहे। उन्होंने जो संविधान दिया, उसकी वजह से हमें हक और सम्मान मिल रहा। संविधान की किताब PDA के लिए किस्मत की किताब है। अगर वो किस्मत की किताब हमारे बीच न होती तो न जाने हम लोगों को क्या-क्या सामना करना पड़ता? आपने-हमने देखा कि कई बार वो वर्चस्व और ताकतवर लोग आपका-हमारा अपमान करते हैं, PDA का अपमान किया। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में जूता तक फेंक दिया गया। कितना अपमान हम लोगों को सहना पड़ता है। 5- उद्योगपतियों को ताकतवर करोगे तो सरकार की नहीं सुनेंगे
इंडिगो से जुडे सवाल पर अखिलेश ने कहा- अगर उद्योगपतियों को ताकतवर करोगे, तो इसी तरह से फेस करना पड़ेगा। वो सरकार की नहीं सुनेंगे। लोगों ने शायद कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि इस तरह से फ्लाइट बंद हो जाएंगी। अब 2012 की 2 तस्वीरें देख लीजिए- आगरा शहर से 40 किमी दूर है दरगाह
शेख सलीम चिश्ती एक सूफी संत थे। उनकी दरगाह आगरा से करीब 40 किमी दूर फतेहपुर सीकरी में है। जून, 1573 में अकबर ने गुजरात विजय के साथ इस क्षेत्र को भी जीत लिया था। तब इसका नाम फतेहपुर सीकरी रखा गया था। अकबर ने इस दरगाह का निर्माण संत के सम्मान में साल 1580 से 1581 के बीच करवाया। शेख सलीम चिश्ती ने अकबर और उसके बेटे को आशीर्वाद दिया था कि भविष्य में सलीम, जहांगीर के नाम से पहचाना जाएगा। यहां दर्शन के लिए अलग-अलग समुदायों के लोग आते हैं। दरगाह की खासियत जानिए सफेद संगमरमर से बनी यह दरगाह फतेहपुर सीकरी की जामा मस्जिद परिसर में स्थित है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु मन्नतें लेकर पहुंचते हैं। मान्यता है कि सूफी संत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पर प्रार्थना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। खासतौर पर संतान की इच्छा पूरी होने की परंपरागत मान्यता यहां सदियों से जुड़ी रही है। दरगाह की वास्तुकला मुगल युग की बारीक कारीगरी का उदाहरण है। संगमरमर पर जाली स्क्रीन की नक्काशी, ज्यामितीय पैटर्न और पुष्प डिजाइन इसे दुनिया की सबसे सुंदर सूफी दरगाहों में शामिल करते हैं। दरगाह तक पहुंचने के लिए संगमरमर की ऊंची चौकी पर बनी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। अंदर परिसर में सफेद कफन में ढंकी शेख सलीम चिश्ती की कब्र स्थित है। यहां हर साल उर्स होता है, जिसमें देश के विभिन्न सूफी खानकाहों से आए लोग चादरपोशी और कव्वाली के बीच शेख सलीम चिश्ती को श्रद्धांजलि देते हैं। शुक्रवार और त्योहारों के दिनों में दरगाह पर भारी भीड़ उमड़ती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित यह दरगाह न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारत की गंगा-जमुनी तहजीब और मुगल स्थापत्य की विरासत का भव्य प्रतीक भी है। ————————— ये खबर भी पढ़िए- बाबरी विध्वंस की बरसी- यूपी में हाईअलर्ट, काशी में कमांडो तैनात, अयोध्या में लोगों को रोक-रोककर चेकिंग आज (6 दिसंबर) पूरे यूपी में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। आज के दिन ही साल 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा गिराया गया था। इसकी बरसी पर अयोध्या में राम मंदिर के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस गश्त कर रही। लोगों को रोक-रोककर चेकिंग की जा रही है। रेलवे स्टेशन पर लोगों से पूछताछ की जा रही है। पढ़ें पूरी खबर…