सास ने दामाद को किडनी देकर दिया नया जीवन:लखनऊ में रोबोट से किडनी ट्रांसप्लांट हुआ, आठवें दिन मरीज को छुट्टी मिली

लखनऊ में किडनी फेलियर की समस्या से जूझ रहे जवान दामाद को नया जीवन देने के लिए सास ने किडनी डोनेट कर दी। राजधानी के कॉर्पोरेट हॉस्पिटल में रोबोट के जरिए किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। महज आठ दिन में मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। जानकारी के मुताबिक, लखनऊ के 31 साल के कमलेश लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे थे। करीब तीन साल पहले क्रॉनिक किडनी रोग का पता चलने पर एक हॉस्पिटल में उन्होंने अपना इलाज शुरू करवाया, लेकिन उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता चला गया। हाई बीपी से किडनी हुई थी फेल इसके बाद परिवार मरीज को लेकर लखनऊ के मैक्स हॉस्पिटल पहुंचा। यहां नेफ्रोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांट के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. वेंकटेश थम्मिशेट्टी से सलाह ली। इस बीच हॉस्पिटल पहुंचते ही उनकी हालत और गंभीर हो गई। किडनी जवाब दे चुकी थी, ऐसे में तुरंत ट्रांसप्लांट ही आखिरी विकल्प बचा था। इस बीच परिवार में कमलेश को कोई डोनर नहीं मिला। उनकी 51 साल की सास साधना देवी ने खुद आगे आकर किडनी दान करने की पेशकश की। हॉस्पिटल की ट्रांसप्लांट टीम ने दा विंची एक्सआई रोबोट की मदद से रोबोटिक असिस्टेड किडनी ट्रांसप्लांट करने का फैसला किया। चार दिन बाद डोनर को मिली छुट्टी मैक्स लखनऊ के डायरेक्टर यूरोलॉजी डॉ.अदित्य के शर्मा ने बताया कि इस मामले में डोनर की उम्र ज्यादा होने के बावजूद हमने बेहद सटीकता और न्यूनतम आघात के साथ सर्जरी की। डोनर को चौथे दिन ही काफी बेहतर हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, वहीं रिसीपिएंट की रिकवरी भी बेहतरीन रही और आठवें दिन उन्हें भी छुट्टी दे दी गई। छोटे से चीरे से हुई सफल सर्जरी डॉ.राहुल यादव ने बताया कि रोबोटिक असिस्टेड किडनी ट्रांसप्लांट में बहुत छोटे चीरे के साथ करने की सुविधा दी। इसमें 3D में जटिल सर्जरी में अहम साबित होता है। इससे खून बहने की संभावना कम होती है, जरूरी ऊतकों की सुरक्षा होती है और नई किडनी जल्दी से सही तरीके से काम करने लगती है। डोनर और रिसीपिएंट दोनों की तेज और आरामदायक रिकवरी ने एक बार फिर से साबित किया कि रोबोटिक ट्रांसप्लांट ही भविष्य है।