दिल्ली के झंडेवालान स्थित ऐतिहासिक श्री बाबा पीर रतननाथ जी महाराज पेशावर वाले मंदिर-दरगाह पर 29 नवंबर 2025 को हुई प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में सहारनपुर में श्रद्धालुओं ने प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में नारेबाजी की और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह मंदिर-दरगाह सदियों से सनातन परंपरा, अखंड राम नाम जप, लंगर सेवा और गौसेवा का प्रमुख केंद्र रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हालिया कार्रवाई के दौरान तुलसी वाटिका और लंगर हॉल सहित कई धार्मिक संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया गया, जिससे धार्मिक गतिविधियां बाधित हुईं। श्रद्धालुओं ने दावा किया कि इससे स्थानीय आस्था के साथ-साथ देश-विदेश में रहने वाले पंजाबी और हिंदू समाज की भावनाएं भी आहत हुई हैं। सेवादार लक्ष्मी नारायण ने बताया कि वर्ष 1947 में देश विभाजन के समय यह गद्दी पेशावर से दिल्ली लाई गई थी और उस दौरान पूरी भूमि विधिवत रूप से आवंटित की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की कार्रवाई में मंदिर की पावन भूमि पर कब्जा कर लिया गया, लंगर हॉल को ध्वस्त कर दिया गया और पूजा-अर्चना बुरी तरह प्रभावित हुई। दरगाह पर हुई बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में सहारनपुर में पंजाबी समाज का आक्रोश स्पष्ट रूप से देखा गया। प्रदर्शनकारी भगवा झंडे लेकर भजन-कीर्तन करते हुए सड़कों पर उतरे और दरगाह की भूमि को सुरक्षित रखने की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप कर धार्मिक स्थल की भूमि को बचाने की अपील की। जिला प्रशासन को प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें बुलडोजर कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने और निष्पक्ष जांच की मांग की गई। इस दौरान महिला सेवादार और सत्यनारायण सेवादार ने भी अपनी बात रखी और कार्रवाई को अनुचित बताया। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन लोगों में गहरा आक्रोश साफ नजर आया।