कानपुर के गौर हरि सिंहानिया मैनेजमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट में चल रहे दो दिवसीय लिटरेचर फैस्टिवल का शनिवार को समापन हुआ। 7वें कानपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन पहले सत्र की शुरूआत ओपन माइक कार्यक्रम हुआ, जिसमें बुद्धजीवियों ने अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान बताया गया कि व्यक्ति पैदा होता है। लेकिन उसे जीने के लिए साहित्य, संवेदना और समाज की आवश्यकता होती है। संचालक लेखक प्रखर श्रीवास्तव ने किया। इसमें रामा शिव, जमाल अहमद, अविग्गना गौतम, अमन अग्रवाल, जसमन कौर आहूजा, वृद्धि पाण्डेय, ऋतिका पाण्डेय, जाया दुवेदी, अनहद कौर, रिद्धिमा गुप्ता व रूपा त्रिपाठी ने अपनी प्रस्तुति दी। शॉर्ट फिल्म का किया गया प्रदर्शन
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शॉर्ट फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। इसमें नमन मेहरा की फिल्म ‘धुंधली यादें’ में अलज़ाइमर और डाईमेंशिया के मरीजों की सुरक्षा को दिखाया गया। राघवी अग्रवाल और विशाखा सिंह द्वारा निर्देशित फिल्म ‘दिस इस नॉट माय होम’ पारिवारिक भावनात्मक सम्बन्धों पर आधारित थी। इसके बाद विशाखा और स्नेहा द्वारा निर्देशित फिल्म ‘मझदार’ में वर्षों से कालपी में बन रहे हस्त निर्मित कागज़ की कहानी दिखाई गई। पूर्व पीएम के सलाहकार ने दी जानकारी
कार्यक्रम के अगले सत्र में ‘द पैलेस’ में सीएसडीएस प्रो. अनन्या बाजपेई से आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर सयान चटोपाध्याय ने संवाद किया। इसके बाद कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया से जुड़े रहे व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई केसालाहकार रहे सुधीन्द्र कुलकर्णी ने अपने विचार रखे। जिसमें उन्होंने कहा इस विषय पर बात करने का मकसद एक संगठन की बुराई या दूसरे की तारीफ़ नहीं है, बल्कि सत्य को खोजने और इन संगठनों की यात्रा पर एक नजर डालने की कोशिश है। पाकिस्तान के आतंकी ठिकाने हुए नष्ट
ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय वायु सेना के पूर्व एयर मार्शल दीप्तेंदु चौधरी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। उनसे वरिष्ठ पत्रकार व जाने माने समाचार पत्र के संपादक सुधीर मिश्रा ने बात की। जिसमें एयर मार्शल दीप्तेंदु चौधरी ने भारत, पाकिस्तान और चीन के संबंधों पर बात की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के समय भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने का लक्ष्य रखा था। इसमें भारत सफल भी रहा था।