ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो पॉइंट पर सोमवार को भारतीय किसान यूनियन की महापंचायत शुरू हो गई है। रैली में गौतम बुद्ध नगर के अलावा अलीगढ़, मथुरा, हाथरस और आगरा के करीब 1 हजार किसान इकट्ठा हुए हैं। रैली में शामिल हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा- हमारे गांव में आबादी, खेती-बाड़ी को मिलाकर 4-5 मुद्दे हैं। ये सरकार लुटेरों की सरकार है। पूंजीवाद की सरकार है। इस सरकार ने देश पर कब्जा कर लिया। अब ये अरावली के 100 मीटर से नीचे के पहाड़ों की कटिंग करेंगे। जबकि अरावली के पश्चिम साइड रेत के टीले बने हैं। ये रेत जब राजस्थान से उड़कर आती है तो अरावली के पहाड़ उनको रोकते हैं। फिर शुद्ध हवा हमारे पास आती है। लेकिन पता नहीं कौन ये फैसले ले रहा है। अगर हमारी समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ये हैं किसानों की मांगें महापंचायत में किसानों की प्रमुख मांगों में यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई भूमि पर बढ़े हुए 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा और 10 प्रतिशत विकसित आवासीय भूखंड दिए जाने की मांग शामिल रही। किसानों ने स्पष्ट किया कि यह मांग केवल गौतम बुद्ध नगर तक सीमित नहीं है, बल्कि अलीगढ़, हाथरस, आगरा और मथुरा तक के सभी प्रभावित किसानों पर समान रूप से लागू की जाए। इसके साथ ही यमुना एक्सप्रेसवे के दोनों ओर सर्विस रोड का तत्काल निर्माण कराए जाने की भी मांग रखी गई। जेवर में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से प्रभावित और विस्थापित किसानों के मुद्दे भी महापंचायत में प्रमुखता से उठाए गए। किसानों ने विस्थापन नीति में संशोधन कर वर्ष 2023 के मानकों के अनुसार भूमि और संपत्ति का उचित मुआवजा दिए जाने की मांग की। उनका कहना है कि वर्तमान नीति किसानों के हितों की रक्षा करने में नाकाम साबित हो रही है। इसके अलावा किसानों ने प्रभावित सभी जनपदों में स्थानीय किसानों और उनके परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की। विशेष रूप से जेवर एयरपोर्ट से प्रभावित किसानों के बच्चों को एयरपोर्ट में रोजगार सुनिश्चित करने की बात कही गई। किसानों का कहना है कि जिनकी जमीन और आजीविका इस परियोजना के कारण प्रभावित हुई है, उन्हें रोजगार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। महापंचायत में भूमिहीन किसानों और मजदूरों के मुद्दे भी उठाए गए। किसानों ने मांग की कि भूमिहीन किसानों और मजदूरों को कम से कम 120 वर्ग मीटर का भूखंड दिया जाए। साथ ही यमुना विकास प्राधिकरण में किसानों को दिए जाने वाले सबसे छोटे भूखंड का आकार भी न्यूनतम 120 वर्ग मीटर निर्धारित किया जाए। किसान महापंचायत से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…