ARR में मीटर की लागत भी जोड़ी:स्मार्ट मीटर की 4000 करोड़ की कीमत उपभोक्ताओं से वसूलने की तैयारी में पावर कॉरपोरेशन

उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बोझ डालने की तैयारी है। पावर कॉरपोरेशन ने चालाकी से वर्ष 2026-27 की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) में स्मार्ट मीटर की लागत उपभोक्ताओं पर डालने की कोशिश है। एक तरफ विधानसभा में ऊर्जा मंत्री बयान देते हैं कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कोई लागत उपभोक्ताओं से नहीं ली जाएगी। दूसरी ओर पावर कार्पोरेशन मार्च 2026 तक सभी वितरण कंपनियों में स्मार्ट मीटर लगाने का आकलन करते हुए प्रति मीटर 114.57 रुपए ओपेक्स के आधार पर करीब 4000 करोड़ रुपए का वार्षिक भार उपभोक्ताओं पर थोपने की तैयारी में जुट गई है। पूर्वांचल में अकेले 1109 करोड़ का प्रस्तावित भार पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में मार्च 2026 तक 39 लाख 29 हजार 899 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का लक्ष्य है। इसके लिए ARR में करीब 1109 करोड़ जोड़कर इसे बिजली बिलों के जरिए उपभोक्ताओं से वसूलने की तैयारी है। इसी तरह अन्य वितरण कंपनियों में भी यही खेल चल रहा है। केंद्र सरकार का आदेश के बावजूद वसूल रहे पैसा उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि भारत सरकार ने 2023 में ही साफ आदेश दे दिया है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की किसी भी तरह की लागत उपभोक्ताओं पर नहीं डाली जाएगी। लेकिन अब मीटर लगाते समय सीधे पैसे नहीं लेंगे, बल्कि बिजली दरों में जोड़कर वसूली करेंगे। यह केंद्र के आदेश का खुला उल्लंघन है। टेंडर 18,885 करोड़ से बढ़ाकर 27,342 करोड़ किया, अवधेश वर्मा ने बताया कि स्मार्ट मीटर परियोजना का अनुमोदित टेंडर 18,885 करोड़ रुपए था, जिसे बढ़ाकर 27,342 करोड़ रुपए में उद्योगपतियों को दे दिया गया। अब इस बढ़ी लागत का बोझ आम जनता पर डालने की साजिश रची जा रही है। पहले ही 3.33 लाख उपभोक्ताओं से 6016 रुपए प्रति मीटर वसूले परिषद ने सवाल उठाया कि 10 सितंबर से अब तक करीब 3,33,000 उपभोक्ताओं से प्रति मीटर 6016 रुपए की दर से गलत वसूली की जा चुकी है। अगर अब ARR में भी स्मार्ट मीटर की लागत जोड़ी गई, जो उपभोक्ताओं पर दोहरा मार पड़ेगी।