सुल्तानपुर में 23 दिसंबर, 2011 को एक पीजी कॉलेज के प्रिंसिपल की हत्या हो गई थी। इस हत्याकांड में अनिल मिश्रा नाम के युवक को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में अनिल को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। इसके बाद सोमवार शाम को अनिल ने आत्महत्या कर ली थी। इस दौरान उसने ढाई पेज का सुसाइड नोट भी छोड़ा था। इसमें उसने गंभीर आरोप लगाए हैं। लिखा है- मैं बेकसूर था। जज साहब ने मुझे सजा सुना दी। मैं 3 साल से नौकरी की तलाश में भटक रहा हूं। सिर्फ इसलिए कि मैं अपने बच्चों को बेहतर भविष्य दे सकूं, लेकिन मुझे कोई काम नहीं दे रहा। मैं शायद इतने ही समय के लिए दुनिया में आया था। इस सुसाइड नोट के सामने आने के बाद बहुचर्चित हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। नोट में अनिल मिश्रा ने खुद को ‘मकड़जाल में फंसाया गया बेकसूर’ बताते हुए न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। देखें 2 तस्वीरें… बता दें, 23 दिसंबर, 2011 को गनपत सहाय पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रताप बहादुर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह अपने अंगरक्षक सुरेश सिंह के साथ बैक पेपर परीक्षा की निगरानी कर रहे थे। तभी उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी गई थी। इस मामले में कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने इसे सुनियोजित हत्या करार दिया था। कॉलेज प्रशासन और स्टाफ के अलावा छात्रों से भी पूछताछ की गई थी। इसमें पुराने विवाद होने और परीक्षा पर ड्यूटी के फैसलों की जांच शुरू की गई। अक्टूबर, 2021 में इस मामले में पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। जिनमें अनिल मिश्रा भी शामिल था। अब जानिए सुसाइड नोट में क्या लिखा सुसाइड नोट में अनिल मिश्रा ने अपने बेटे और बेटी को पढ़ाई पर ध्यान देने और जीवन में आगे बढ़ने की बात लिखी है। बच्चों से कहा कि वे अपनी मां सुषमा का सहारा बनें, क्योंकि अब वही उनके लिए मां और पिता दोनों हैं। यह भी लिखा कि बच्चों को उनकी कमी महसूस न हो, इसका ख्याल रखा जाए। अनिल ने अपने संघर्ष का जिक्र करते हुए बताया कि वह 3 साल तक नौकरी की तलाश में भटकता रहा। मकसद सिर्फ इतना था कि कुछ आमदनी हो जाए और बच्चों की बेहतर परवरिश कर सकें। बेटे को नसीहत देते हुए लिखा कि बुरे वक्त में माता-पिता के अलावा कोई साथ नहीं देता। इसलिए किसी के बहकावे में न आना। अनिल मिश्रा के तीन बच्चे हैं। बड़ी बेटी आंचल (22) आकांक्षा (19) और शशांक (10)। बेटियां पढ़ाई करती हैं। पत्नी रामलीला मैदान स्कूल में ट्रस्ट की प्रबंधक हैं। प्रिंसिपल की हत्या के समय अनिल मिश्रा कॉलेज में ही लिपिक के पद पर कार्यरत था। 2015 में दाखिल हुई थी चार्जशीट
पुलिस जांच में कई संदिग्ध सामने आए थे, जिनमें अनिल मिश्रा समेत कुल 5 आरोपियों पर नामजद मुकदमा दर्ज किया गया था। कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी की गई, वहीं कुछ फरार हो गए थे। 2015 में पुलिस ने सेशन कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। गवाहों और बयानों के आधार पर रिपोर्ट पेश की गई। इस दौरान ट्रायल के दौरान कई बार तारीखें बढ़ीं। अक्टूबर, 2021 में सुल्तानपुर की निचली अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पांचों आरोपियों चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जितेंद्र प्रकाश मिश्रा, जितेंद्र शुक्ला, सौरव मिश्रा, अनिल मिश्रा और दीपक तिवारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही 50 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया था। 2022 में हाईकोर्ट में की गई अपील
सभी दोषियों ने 2022 में हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। अपील लंबित रहने तक कुछ दोषियों को जमानत दे दी गई। जमानत पाने वालों में अनिल मिश्रा भी शामिल था। तभी से वह जेल से बाहर था। सोमवार (5 दिसंबर) को अनिल मिश्रा ने आत्महत्या कर ली। शव कोतवाली नगर क्षेत्र के रामलीला मैदान स्थित विद्यालय परिसर से बरामद हुआ था, जहां उनकी पत्नी ट्रस्ट की प्रबंधक हैं। ———————— ये खबर भी पढ़िए… महिला सिपाही को लूटने वाले का जुलूस निकाला, दरोगा बोले- कान पकड़, वरना मारकर गिरा देंगे कानपुर में महिला कॉन्स्टेबल से लूट करने वाले बदमाश ने बुधवार को सरेंडर कर दिया। वह डरा हुआ था कि कहीं पुलिस उसका एनकाउंटर न कर दे। पुलिस लुटेरे को उसी जगह ले गई, जहां उसने महिला कॉन्स्टेबल का पर्स लूटा था। करीब एक किमी तक उसका जुलूस निकाला। वह कान पकड़कर माफी मांगता रहा। पढ़ें पूरी खबर…