रज़ा पुस्तकालय में गुरु गोविंद सिंह जयंती पर संगोष्ठी:रामपुर में बलिदान, साहस, समानता और मानवता के संदेश पर प्रकाश डाला गया

रामपुर रज़ा पुस्तकालय एवं संग्रहालय में श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज की जयंती (प्रकाश पर्व) पर एक संगोष्ठी और गुरबाणी (शबद-कीर्तन) कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन रंग महल सभागार में दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुआ, जिसमें गुरु साहिब के जीवन, बलिदान और मानवतावादी विचारों पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रज़ा पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने की, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (कृषि) बलदेव सिंह औलख मुख्य अतिथि थे। डॉ. मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन धर्म, साहस और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने “देहु शिवा वर मोहि इहे…” पंक्तियों का उल्लेख करते हुए बताया कि जयंती का उद्देश्य कर्मकांड नहीं, बल्कि महापुरुषों के आदर्शों को आत्मसात करना है। उन्होंने सिख पंथ के त्याग और बलिदान को भारत की साझा विरासत बताया। राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख ने गुरु गोविंद सिंह जी के साहस और सामाजिक न्याय के संदेश को वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी शताब्दी का जिक्र करते हुए कहा कि धर्म और मानवता की रक्षा के लिए उनका बलिदान इतिहास में अद्वितीय है। औलख ने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना को समानता और आत्मसम्मान का प्रतीक भी बताया। विशिष्ट अतिथियों में निर्मल सिंह कंग, दर्शन सिंह खुराना, शिवांजलि के. बरार, सतनाम सिंह मट्टू, चरनजीत सिंह और मंदीप कौर शामिल थे। इन सभी वक्ताओं ने गुरु साहिब को निर्भीकता, सेवा और समानता का संदेशवाहक बताया। उन्होंने यह भी कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी एक विद्वान, कवि, दार्शनिक और महान योद्धा थे, जिनकी शिक्षाएं आज भी समाज को सही दिशा प्रदान करती हैं।