महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के सहयोग से आयोजित 45 दिवसीय सुगंध उद्योग प्रशिक्षण कार्यक्रम शनिवार को संपन्न हो गया। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। यह प्रशिक्षण हर प्रसाद गुप्त इन्कयूबेशन फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में अगरबत्ती, धूपबत्ती, हवन सामग्री और सुगंध आधारित उत्पादों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया। इसका आयोजन फ्रेगरेंस एवं फ्लेवर विकास सेंटर (FFDC), कानपुर की विस्तार इकाई, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के आउटरीच प्रकोष्ठ और साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट के संयुक्त देखरेख में किया गया था। समापन समारोह के मुख्य अतिथि काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी थे। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को केवल प्रशिक्षण देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें नवाचार, बाज़ार से जुड़ाव और आत्मनिर्भरता की पूरी प्रक्रिया से जोड़ना भी आवश्यक है। कुलपति ने जोर दिया कि ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को पहचान दिलाकर उन्हें आत्मनिर्भर भारत से जोड़ते हैं। प्रो. त्यागी ने बताया कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप है, जो कौशल विकास, नवाचार और समाज से जुड़ी शिक्षा पर विशेष बल देती है। समारोह में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए और उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों का भी अवलोकन किया गया। इस 45 दिवसीय प्रशिक्षण में कुल 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया। उन्हें उत्पाद निर्माण, गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग और उद्यमिता से संबंधित व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस अवसर पर हर प्रसाद गुप्त इन्कयूबेशन फाउंडेशन के निदेशक प्रो. मोहम्मद आरिफ, आउटरीच प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. संजय, FFDC कानपुर के सहायक निदेशक डॉ. भक्ति विजय शुक्ला और साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट के निदेशक अजय कुमार सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, प्रशिक्षक और बड़ी संख्या में प्रतिभागी मौजूद थे।