उन्नाव के हाकिमटोला मोहल्ला स्थित गुरुद्वारा साहिब में मंगलवार शाम सिख समुदाय ने लोहड़ी पर्व धूमधाम से मनाया। श्री गुरु सिंह सभा के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में पंजाबी और सिख समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। गुरुद्वारा परिसर में भक्ति, उल्लास और भाईचारे का वातावरण रहा। कार्यक्रम की शुरुआत गुरुद्वारा साहिब के कीर्तनी जत्थे द्वारा शब्द कीर्तन से हुई। कीर्तन के माध्यम से गुरु साहिब की महिमा का गुणगान किया गया। इसके बाद कथावाचक ने लोहड़ी पर्व के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह पर्व प्रकृति, फसल और नए जीवन के स्वागत का प्रतीक है। मुख्य ग्रंथी भाई साहिब और सेवादारों ने परंपरानुसार लकड़ियां जलाकर पवित्र अग्नि प्रज्वलित की। गुरुद्वारा परिसर में पुरुष, महिलाएं और बच्चे एकत्रित हुए। उन्होंने रेवड़ी, तिल, मूंगफली समेत अन्य पारंपरिक सामग्री अग्नि में अर्पित की। संगत ने अग्नि की परिक्रमा करते हुए सुख-समृद्धि और खुशहाली की अरदास की। सिख परंपरा में लोहड़ी पर्व उन परिवारों के लिए विशेष होता है, जहां नववधु का आगमन हुआ हो या नवजात शिशु का जन्म हुआ हो। ऐसे परिवार इस पर्व को विशेष उत्साह के साथ मनाते हैं। इस अवसर पर कई परिवारों ने सपरिवार भाग लेकर पारंपरिक नृत्य और गीतों के साथ पर्व का आनंद लिया। पर्व के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा साहिब की ओर से गुरु का लंगर भी आयोजित किया गया। इसमें सभी श्रद्धालुओं ने बिना किसी भेदभाव के पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। लंगर सेवा में सेवादारों ने पूरी निष्ठा और सेवा भाव के साथ योगदान दिया। इस मौके पर सिख समुदाय के वरिष्ठजन, महिलाएं, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने एक-दूसरे को लोहड़ी की बधाइयां दीं। यह पर्व सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बना।