‘मुजफ्फरनगर से सोनू मुझसे मिलने आ रहा था। फोन करके कहने लगा कि मौसी मैं 80 हजार लेकर आ रहा हूं, भैया के साथ बाइक खरीदने जाएंगे। यही उसकी आखिरी बात थी। तब क्या पता था कि सोनू मुझसे मिल ही नहीं पाएगा। कोई ऑटो वाला उसको मार डालेगा।’ यह बताते हुए 60 साल की मदनवती की आंखें भर आईं। वह कहती हैं कि रोहित कश्यप उर्फ सोनू मेरी बड़ी बहन का बेटा था। 5 जनवरी को आखिरी बार बात हुई, अगले दिन उसकी मौत का पता चला। सोनू के सिर पर ईंट से हमला किया गया। फिर उसके शरीर पर तेल डालकर आग लगा दी गई। पुलिस ने जिस ऑटो ड्राइवर को अरेस्ट किया, वो नाबालिग और ठाकुर बिरादरी का है। इस मर्डर केस के बाद मुजफ्फरनगर, लखनऊ और दिल्ली में प्रदर्शन हुए। कांग्रेस और सपा इस मामले को OBC बनाम ठाकुर बनाने की कोशिश कर रही। इस मामले को लेकर इतनी सरगर्मी क्यों है? इसको समझने के लिए दैनिक भास्कर टीम ग्राउंड जीरो पहुंची। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… मौसी बोलीं- हम रातभर जागे, वो नहीं आया
मेरठ के सरधना इलाके में ज्वालागढ़ है। यहां सोनू की मौसी मदनवती रहती हैं। हम उनके घर पहुंचे। घर के बाहर लोगों का जमावड़ा था। कुछ सांत्वना दे रहे थे, कुछ सिर्फ यह जानने पहुंचे थे कि ये सब कैसे हुआ? हमारी मुलाकात मदनवती, उनके पति, बेटे सोनू, इंदर और गांव के लोगों से हुई। यहां कुछ कश्यप बिरादरी के नेता भी मौजूद थे। मदनवती के बेटे सोनू ने बताया- 5 जनवरी को मेरी मुजफ्फरनगर वाली मौसी का बेटा रोहित उर्फ सोनू हमसे मिलने मेरठ आ रहा था। उसका कॉल आया कि मैं रुपए लेकर आ रहा हूं, मुझे बाइक दिला देना। हम उसके आने का इंतजार करते रहे, मगर वो नहीं आया। रात को उसकी कॉल आई कि मेरा किसी ऑटोवाले से झगड़ा हो गया है। इसने मेरे पैसे छीन लिए हैं। मेरे काफी पैसे इसने खर्च भी करा दिए हैं। भैया मुझे बचाने आ जाओ। पुलिस से मदद मांगी, सोनू का मोबाइल स्विच ऑफ
इसके बाद हम लोग सोनू की बताई जगह उसे बचाने पहुंचे, तब सोनू वहां नहीं मिला, न कोई ऑटोवाला दिखा। हमें घबराहट हुई तो हमने सलावा चौकी पर जाकर बताया कि मेरा मौसी का बेटा लापता है। उसका फोन आया था और उसने क्या कुछ मुझे बताया था। पुलिस ने कहा- ठीक है, हम देखते हैं। इसे बाद हम घर आ गए, लेकिन सोनू सुबह तक नहीं आया। उसके बताए नंबर पर हम कॉल करते, तो नंबर भी स्विच ऑफ हो गया था। पुलिस ने बताया- अधजली लाश मिली है, आकर देख लो
मौसेरे भाई सोनू ने बताया- रात भर हम रोहित उर्फ सोनू की चिंता में भटकते रहे, लेकिन हमें उसका कुछ पता नहीं चला। दूसरे दिन पुलिस का मेरे पास फोन आया। हमसे कहा गया कि एक लाश मिली है, आकर पहचान कर लो। हम लोग घबरा गए, पुलिस के साथ लाश देखने पहुंचे। वो बुरी तरह जली हुई थी। सिर्फ उसके जूते के कुछ हिस्से बचे थे। वो देखकर मैं चौंक गया, क्योंकि वो सोनू के ही जूते थे। हमने पुलिस को बताया कि ये मेरी मौसी के बेटे सोनू के जूते हैं। वो हमसे मिलने आ रहा था। पुलिस ने बताया कि उन्हें सोनू की लाश के पास कोई सामान या रुपए नहीं मिले हैं। अब क्राइम स्पॉट समझिए स्कूल के बाहर लाश जलती मिली, सबसे पहले चौकीदार ने देखी
पुलिस को ये जली हुई डेडबॉडी गांव के ही किसान स्कूल के बाहर मैदान में मिली थी। स्कूल के एक चौकीदार ने उस रात स्कूल के बाहर कुछ जलता हुआ देखा था। करीब जाकर देखने पर उसे वहां एक इंसान का हाथ और उंगली दिखी। चौकीदार घबरा गया। उसने पुलिस को तुरंत कॉल करके बताया कि शायद कोई इंसान जल रहा है। पुलिस तुरंत शव और आसपास सबूतों को अपने कब्जे में लिया था। सड़क से सोनू को घसीटकर मैदान में लाया था आरोपी
स्कूल के सामने के मैदान में, जहां सोनू कश्यप को जलाया गया, वहां तक करीब 50 मीटर तक उसे घसीटकर लाया गया था। पुलिस ने क्राइम स्पॉट के करीब लगे सीसीटीवी खंगाले। कुछ स्पॉट पर सोनू और आरोपी लड़का एक साथ नजर आए। एक शराब की दुकान पर वो दोनों साथ दिखे। जहां से उन्होंने शराब खरीदी थी। जब पुलिस ने ये फुटेज सोनू की मौसी के बेटों को दिखाई तो उन्होंने उसकी पहचान कर ली। बताया कि ये गांव का रहने वाला लड़का है, जो नाबालिग हैं। ऑटो चलाता है और ठाकुर बिरादरी से है। अपने साथ दूसरों की जान से खिलवाड़ करता है। पहले भी लोगों को परेशान कर चुका है। पुलिस उस लड़के के घर पहुंची। इसके बाद उसने पूछताछ में सच कबूला। घर में अकेला कमाने वाला था सोनू कश्यप
रोहित उर्फ सोनू सिर्फ 26 साल का था। उसके परिवार में बुजुर्ग मां है, जो बीमार रहती हैं। सबसे बड़ी बहन है, जो अविवाहित है। घरों में काम करती है। एक बड़ा भाई है, जो सांस का रोगी है। वो कुछ काम नहीं कर सकता। पिता की 6 साल पहले बीमारी में मौत हो चुकी है। घर में कमाने वाला इकलौता सोनू ही था। सोनू घर में सबसे छोटा था, लेकिन उसकी कमाई से घर चलता था। उसकी शादी नहीं हुई थी। शादी के लिए परिवार लड़की देख रहा था। सोनू पेशे से हलवाई था। उसने कुछ पैसे बचाए थे, जिनसे वो बाइक लेने वाला था। लेकिन वो रुपए कहां गए, पुलिस भी कुछ नहीं बता रही। सोनू के घरवालों का कहना है कि पुलिस ने केवल एक आरोपी को अरेस्ट कर जेल भेजा है। जबकि इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं। बिरादरी के कारण कोई बचना नहीं चाहिए। हमको मुआवजा और बहन को सरकारी नौकरी मिले। अब घटना पर पुलिस की बात पढ़िए… शराब पीने के दौरान हुआ झगड़ा और मर्डर
मेरठ SSP डॉ. विपिन ताडा का कहना है- आरोपी ऑटो चालक ने बताया कि मुजफ्फरनगर के लड़के से उसकी दोस्ती टेंपो में हुई थी। इसके बाद दोनों ने शराब पीने का प्लान बनाया। दुकान पर शराब खरीदने गए। शराब की दुकान की सीसीटीवी फुटेज में दोनों साथ दिखे। शराब खरीदने के बाद दोनों एक जगह बैठकर शराब पीने लगे। शराब पीने के दौरान उन दोनों में झगड़ा हुआ। इसमें ईंट से मारकर युवक की हत्या की गई। फिर उसे जलाया गया। आरोपी को अरेस्ट कर उसे जेल भेज दिया गया है। अब पूरे मामले पर हो रही राजनीति जानिए… कपसाड़ गांव से सटा है ज्वालागढ़
ज्वालागढ़ गांव, सरधना के ठाकुर चौबीसी के कपसाड़ गांव से सटा है। कपसाड़ वही गांव है, जहां 8 जनवरी को एक ठाकुर बिरादरी के युवक ने दलित महिला सरिता की हत्या कर दी थी।, फिर उसकी बेटी रूबी का अपहरण कर ले गया था। इसके बाद इस मामले ने जातीय सियासत का रूप ले लिया था। कपसाड़ गांव में अघोषित कर्फ्यू लग गया। युवती बरामद नहीं होने और आरोपी अरेस्ट न होने के कारण विपक्षियों ने हंगामा किया। तमाम नेताओं ने पोस्ट किए। परिवार से मिलने भी पहुंचे। माहौल इतना बिगड़ा कि पुलिस ने पूरे गांव को छावनी बना दिया था। अपहरण के 60 घंटे बाद पुलिस ने आरोपी को अरेस्ट किया और पीड़िता रूबी को सकुशल बरामद किया था। अब ठीक बगल के गांव में ठाकुर बनाम OBC मामला होने की वजह से फिर सियासत शुरू हो गई है। इस मामले में भी आरोपी ठाकुर है, जबकि मरने वाला OBC है। पूर्व CM अखिलेश यादव, मायावती, आसपा प्रमुख चंद्रशेखर और कांग्रेस ने सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। सरधना विधायक सपा नेता अतुल प्रधान ने 11 जनवरी को पीड़ित परिवार से ज्वालागढ़ में मिलकर उन्हें सांत्वना दी। साथ ही 1 लाख रुपए की आर्थिक मदद भी की। मेरठ से लखनऊ तक प्रदर्शन
13 जनवरी को इस मामले में मुजफ्फरनगर, मेरठ से लेकर लखनऊ में प्रदर्शन हुए। सपाइयों को घसीटा गया। चंद्रशेखर को मुजफ्फरनगर में पीड़ित परिवार से मिलने से रोका गया। 12 जनवरी को पीड़ित परिवार ने मुजफ्फरनगर में डीएम कार्यालय में जाकर प्रदर्शन किया और न्याय की मांग की। वहीं, 13 जनवरी को मेरठ में कुछ सपा नेता ज्वालागढ़ में पीड़ित परिवार से मिलकर सांत्वना जताने गए तो उन्हें पुलिस ने मिलने से रोक दिया। वहां काफी हंगामा हुआ। आज को मंत्री नरेंद्र कश्यप भी पीड़ित परिवार से मिलने आ सकते हैं। —————————- यह खबर भी पढ़ें – चंद्रशेखर पुलिसवालों से बोले- गोली मार दो, मुजफ्फरनगर में रोका भीम आर्मी चीफ और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद मंगलवार को मेरठ में मारे गए सोनू कश्यप के परिवार से मिलने मुजफ्फरपुर पहुंचे थे। लेकिन सोनू के घर से थोड़ी दूर पहले ही पुलिस ने उन्हें रोक लिया। पुलिस ने बीच सड़क ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर दी और काफिले को आगे बढ़ने नहीं दिया। पढ़िए पूरी खबर…