माघ मेला में किन्नरों का अद्भुत संसार है। किन्नर अखाड़ा के पंडाल के अंदर एक अलग दुनिया दिखती है। यह पहली बार है, जब माघ मेला में 2 किन्नर अखाड़े मौजूद हैं। पहला- किन्नर अखाड़ा, जिसकी महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी है। दूसरा- सनातन किन्नर अखाड़ा, जिसकी महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि (टीना मां) हैं। अखाड़े के अंदर जाते ही किन्नरों की लग्जरी लाइफ स्टाइल देखने को मिलती है। VIP प्रोटोकॉल में एंट्री, आगे-पीछे गनर और महिला बाउंसर की सिक्योरिटी। किन्नरों के चलने के लिए फॉर्च्यूनर और थार जैसी SUV गाड़ियां हैं। किन्रर कहते हैं- शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप जैसा अनुभव करने के लिए हम खुद को 2 से 3 घंटे सजाते हैं। किन्नरों के रहन-सहन को समझने के लिए दैनिक भास्कर की टीम सनातन किन्नर अखाड़े पहुंची। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट… हूटर बजाता काफिला, सुरक्षा के लिए गनर तैनात हमारी टीम अखाड़े के बाहर ही मौजूद थी, तभी अचानक सेवक भीड़ को हटाने लगते हैं। एक तरफ से हूटर की आवाज सुनाई पड़ती है, 10 मिनट में फॉर्च्यूनर और इनोवा जैसी गाड़ियों का काफिला अखाड़े के बाहर आकर रुकता है, इसमें 4 से 5 गाड़ियां दिखती हैं। इसके अंदर से महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि (टीना मां) उतरती हैं। आसपास खड़े लोग दौड़कर उनके पैर छूते हैं। बहुत सादगी से वो सबको आशीर्वाद देते हुए अखाड़े के अंदर चली जाती हैं। गनर और बाउंसर भी उनके पीछे-पीछे अंदर चले जाते हैं। टीना मां मुख्य पंडाल में एक सिंहासन पर बैठ जाती है, इसके बाद आशीर्वाद देने का सिलसिला शुरू होता है। कौशल्या नंद गिरि कहती हैं- हम किन्नरों को समाज में हर जगह तिरस्कृत होना पड़ता है। बचपन में घर वालों ने निकाला तो गुरु के पास पहुंची, बस वहीं से जिंदगी को मकसद मिल गया। 3 घंटे तक मेकअप, फिर करते हैं शिव की आराधना यहां से निकलकर हम संगम लोअर मार्ग पर किन्नर अखाड़े पहुंचे। पता चला कि आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी यहां नहीं हैं, लेकिन 400 से ज्यादा किन्नर संत मौजूद मिले। यहां हमारी मुलाकात महामंडलेश्वर कनकेश्वरी महाराज से हुई। वह माथे पर त्रिपुंड और लाल बिंदी लगाकर बैठी थीं। वह बताती हैं कि किन्नर श्रृंगार में ही अच्छे लगते हैं। हम अपने प्रभु के लिए श्रृंगार करते हैं। अमूमन हमारा श्रृंगार देखकर लोग पूछते हैं कि आप अपने साथ मेकअप आर्टिस्ट लेकर चलती हैं? मेरा जवाब होता है, इतने पैसे तो हमारे पास नहीं हैं कि मेकअप आर्टिस्ट लेकर चलें। हम लोगों को अपना मेकअप खुद ही करना सीखा है। महामंडलेश्वर हर दिन दुल्हन की तरह सजती-संवरती हैं। इसके लिए 3 घंटे लगते हैं। फिर हम अपने इसी स्वरूप के साथ आराध्य भगवान शिव की आराधना करते हैं। 4 घंटे तक भोलेनाथ की पूजा और प्रार्थना में लीन रहते हैं। यह सब कुछ 7 घंटे तक चलता है। 50 लाख की ज्वैलरी पहने, हाथों में आईफोन श्रृंगार की चर्चा के बीच हमने कनकेश्वरी महाराज से उनकी ज्वेलरी के बारे में पूछा। उनके हाथों की अंगुलियों में सोने की हीरे और माणिक जड़ी 6 अंगूठियां थीं। गले में 4 मोटी-मोटी सोने की चेन दिख रही थीं। इनकी कीमत 50 लाख के आसपास थी, हाथ में महंगा आईफोन था।
आप इतना मेकअप करती हैं, आखिर ऐसा क्यों? इस पर मुस्कुराते हुए वह जवाब देती हैं- हम अपने भगवान के लिए और अपने गुरु के लिए मेकअप करती हैं। हमारी गुरु ही हमारे माता-पिता, हमारे भगवान हैं। हम लोगों को सजने का बहुत शौक होता है। यही कारण है कि हम लोग अपना मेकअप खुद करते हैं। हमने पूछा- पूजा किसकी करती हैं? वह कहती हैं- हमारे दिन की शुरुआत बऊचरा मां की पूजा से होती है। करीब एक घंटे तक पूजा-पाठ करती हूं। अर्धनारीश्वर हूं, इसलिए ईष्ट देव भगवान शिव की पूजा करती हूं। ‘8 साल की उम्र में परिवार से अलग होना पड़ा’ उप्र किन्नर कल्याण बोर्ड की मेंबर महामंडलेश्वर कनकेश्वरी कहती हैं- जब मैं 8 साल की थी, तभी परिवार से दूर हो गई। समाज का भी तिरस्कार झेलना पड़ा। मेरे पिता जी कोलकाता में रेलवे में गार्ड की नौकरी करते थे, लेकिन समाज की प्रथा के अनुसार, उन्होंने हमें अलग किया और मैं अनाथ हो गई। कोई मां-बाप नहीं चाहता है कि वह अपने बच्चे को अपने दूर कर दे। लेकिन समाज को देखते हुए हमें अपने परिवार से अलग होना पड़ा। वह कहती हैं- जिस समाज ने कभी हमें ठुकरा दिया था, उसी समाज ने हमें अब अपना भी लिया। आज लोग आशीर्वाद लेने के लिए हमारे पास आ रहे हैं। नासिक से आई महामंडलेश्वर बोलीं- योनि पूजन करते हैं यहां महाराष्ट्र के नासिक से आईं किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर पूजा नंद गिरि अपने किन्नर शिष्यों के साथ पूजा करती हुईं दिखीं। उन्होंने बताया- हम लोग माता कामाख्या का योनि कुंड लगाए हुए हैं। यहां हर दिन करीब डेढ़ से 2 घंटे तक योनि पूजन करते हैं। जिन्हें संतान नहीं, जिनकी शादी नहीं हो रही, उनके लिए हम यहां पूजा करते हैं। देश के कल्याण के लिए भी यहां अनुष्ठान चल रहा है। विशेष रूप से इस पूजा के लिए शाम को 7 बजे से लेकर 8.30 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। यहां आने के बाद हमें पता चला कि अखाड़े की ज्यादातर संत बिना मेकअप के बाहर लोगों के बीच में नहीं निकलतीं। शिविर में हर दिन मां कामाख्या की योनि पूजा की जाती है। किन्नरों के इंस्टा-फेसबुक पर लाखों फालोअर्स किन्रर अखाड़े की महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि (छोटी मां) सोशल मीडिया पर अपनी रील को लेकर ज्यादा चर्चाओं में रहती हैं। वह नए-नए अंदाज में रील बनाकर अपने इंस्टाग्राम पर अपलोड करती हैं। उनके इंस्टा पर 5.45 लाख से ज्यादा फालोअर्स हैं। कभी चलती नाव पर तो कभी हाथों में त्रिशूल लहराते हुए उनके रील्स खूब वायरल होते हैं। साड़ी पहनकर कभी दुल्हन की तरह रोल करते हुए दिख जाती हैं। रील्स बनाने के लिए इन्होंने 2 एक्सपर्ट भी रखें हैं, जो अलग-अलग आकर्षक लुक में रील बनाते हैं। इसी तरह से सनातनी किन्नर अखाड़े से जुड़ी पलक भी रील्स बनाना पसंद करती हैं। इंस्टा पर उनके भी 77 हजार से ज्यादा फालोअर्स हैं। हर बार अलग-अलग लुक में वह अपने वीडियो बनाकर पोस्ट करती हैं। भक्तों की भेंट और मंदिर क्षेत्र से मिलता है फंड मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इतनी लग्जरी लाइफ के लिए रुपए कहां से आते हैं? दरअसल, किन्नरों से आशीर्वाद पाने के लिए हजारों लोग उनके पास पहुंचते हैं। जो भी इनसे आशीर्वाद लेता है, वह खाली हाथ नहीं जाता। स्वेच्छा व श्रद्धा के साथ लोग उन्हें अपनी हैसियत के अनुसार, कुछ न कुछ भेंट करते हैं। महाकुंभ में बड़ी संख्या में किन्नर अखाड़े में लोगों की घंटों तक लाइन लगी रहती थी। पैसे वाले लोग श्रद्धा भाव से अच्छा दान भी करते हैं। आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से आशीर्वाद पाने के लिए लोग कतार में खड़े रहते हैं। अखाड़े की जो महामंडलेश्वर बनाई जाती हैं, उन्हें किसी शहर या बड़े मंदिर का क्षेत्र दिया जाता है। आचार्य महामंडलेश्वर के जरिए बदली किन्नरों के प्रति धारणा किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने थर्ड जेंडरों से जुड़ी 2 किताबें भी लिखी हैं। पहली किताब ‘मी हिजड़ा- मी लक्ष्मी’ है। यह हिंदी, मराठी, इंग्लिश और गुजराती में है। इसी तरह दूसरी किताब ‘द रेड लिप्स्टिक मेनन माई लाइफ’ है। आचार्य कहती हैं कि इन किताबों के जरिए किन्नरों की असली दुनिया के बारे में बताया है। इससे किन्नरों के प्रति लोगों की धारणा भी बदली है। लोग कटाक्ष करते हैं, लेकिन इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। किन्नरों पर जर्मन प्रोडक्शन ने ‘थर्ड जेंडर बिटविन द लाइंस’ फिल्म बनाई। इसी तरह अक्षय कुमार की जो ‘लक्ष्मी’ फिल्म बनी थी, उसमें भी किन्नरों का संघर्ष दिखाया गया था। इसे लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बतौर ब्रांड एंबेसडर सपोर्ट भी किया था। उन्होंने अक्षय कुमार के साथ इस फिल्म की ब्रांडिंग भी की थी। ————- ये भी पढ़ें… शाही बग्घी, विंटेज कार…घोड़े पर सवार होकर निकले किन्नर:कानपुर में 11KM तक नाचते-गाते शोभायात्रा निकाली; देखने वालों की लगी भीड़ कानपुर की सड़कों पर मंगलवार को किन्नर अलग अंदाज में निकले। कोई विंटेज कार पर सवार था, तो कोई रथ और घोड़े पर। किन्नरों का यह अंदाज देखने के लिए सड़क के किनारे लोगों की भीड़ लग गई। यह आयोजन नौबस्ता-अर्रा के शकुंतला लॉन में अखिल भारतीय किन्नर महासभा ने किया। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से 15 हजार से ज्यादा किन्नर शामिल होने पहुंचे। पिछले 4 दिन से रोजाना यह कार्यक्रम चल रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को शोभायात्रा निकाली गई। इसमें राजस्थानी ऊंट और शाही बग्घी भी शामिल रही। पढ़िए पूरी खबर…