“वह 3 रातें कभी भूलने वाली नहीं हैं। दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था। जहां तक नजर जा रही थी, वहां तक सिर्फ बर्फ की चादर फैली हुई थी। कार में जो बिस्कुट और चिप्स पड़े थे, उसी से गुजारा किया। गर्म पानी पीकर भूख मिटाई। हाड़ कंपा देने वाली ठंड से बचने के लिए कार का हीटर ही सहारा बना।” ये कहना है लद्दाख में लापता हुए उन चार दोस्तों का जो आगरा से घूमने गए थे। ये चारों दोस्त 2 दिन और 3 रात तक लापता रहे। अब वे सुरक्षित हैं। उनको सुरक्षित बरामद कर लिया गया है। चारों के परिजन भी लेह पहुंचे हैं। परिवार से मिलते ही चारों दोस्तों ने लापता होने के दौरान के हर पल की आपबीती साझा की। बताया कि किन हालातों में उन लोगों ने बेहद खराब मौसम, अनजान जगह और चारों तरफ पसरे सन्नाटे के बीच 2 दिन और 3 रात गुजारी। बीत रहा हर पल कैसे उनके उम्मीद और हौसलों को तोड़ रहा था? घटनास्थल की 4 तस्वीर देखिए… अब सिलसिलेवार पूरी कहानी पढ़िए… आगरा के मधुनगर निवासी शिवम चौधरी अपने तीन दोस्त जयवीर चौधरी, यश मित्तल और सुधांशु फौजदार के साथ लद्दाख की ट्रिप पर गए थे। सभी आगरा से 6 जनवरी को कार से निकले। लद्दाख पहुंचने के बाद वहां उन्होंने नया मोबाइल नंबर लिया। फिर परिवार से लगातार कनेक्ट रहे, बातचीत होती रही। 9 जनवरी को सभी लेह के पेंगोंग झील पर थे। वहां से उन्होंने वीडियो कॉल से घर पर बात भी की। उसके बाद से उनका संपर्क टूट गया। घर वालों ने कई बार उसी नंबर पर कांटेक्ट किया, लेकिन बात नहीं हो सकी। परेशान होकर घर वालों ने 11 जनवरी को सदर थाना में मिसिंग शिकायत दर्ज कराई। गुलमर्ग, सोनमर्ग होते हुए लद्दाख पहुंचे…
शिवम चौधरी, जयवीर सिंह, यश मित्तल और सुधांशु फौजदार आगरा से गुलमर्ग गए। वहां से सोनमर्ग होते हुए पैंगोंग झील पहुंचे। 9 जनवरी की शाम लगभग 5:30 बजे चारों ने वीडियो कॉल कर अपने परिजन को वहां का नजारा दिखाया। इसके बाद से उनका संपर्क टूट गया। दो दिन तक संपर्क नहीं होने पर पुलिस में शिकायत दो दिन तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर चारों के घर वाले परेशान हो गए। शिवम के पिता दौलत राम चौधरी ने लोकल पुलिस के अलावा स्थानीय सांसद और अन्य जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया। उसके बाद रक्षा और गृह मंत्रालय की मदद मांगी गई। सूचना पर सेना भी सक्रिय हो गई। शिवम चौधरी के पिता दौलतराम चौधरी ने बताया- पुलिस और अन्य एजेंसियां सक्रिय हुईं तो उनको ट्रेस किया गया। सबके लोकेशन मिले लेकिन जिस हालत में वे मिले वह बहुत खौफनाक था। सैटेलाइट से मिली गाड़ी की लोकेशन
सैटेलाइट से युवकों की गाड़ी की जानकारी मिली। गाड़ी लेह से 125 किलोमीटर दूर मनाली मार्ग के पास पांग में थी। फिर सेना और पुलिस इन युवकों तक पहुंच गई। तत्काल युवकों के सुरक्षित मिलने की खबर शिवम के पिता को दी गई। इसके बाद सभी के परिजन फ्लाइट से लेह पहुंचे। रास्ता भटके, 20 किमी पैदल चले, फिर पुलिस को मिले चारों दोस्तों को बरामद करने के बाद लद्दाख पुलिस ने वीडियो जारी किया। पुलिस ने बताया- चारों दोस्तों का पिछला चार दिन जद्दोजहद और संघर्ष के बीच गुजारा। पहले रास्ता भटके, फिर गाड़ी 20 फिट गहराई में चली गई। डीजल खत्म हो गया तो 20 किलोमीटर पैदल चले। इसी बीच पुलिस उन तक पहुंच गई। बर्फबारी के बीच कैसे गुजारीं 3 रात, जानिए…
शिवम और जयवीर आपस में रिश्तेदार हैं। इनको ढूंढने लेह पहुंचे शिवम के ताऊ बेटे चंद्रेश चौधरी से दैनिक भास्कर ने फोन पर बात की। उन्होंने बताया-चारों सकुशल मिल गए हैं। 15 जनवरी को आगरा के लिए वापसी करेंगे। चारों दोस्तों ने चंद्रेश चौधरी से जो बताया वह उन्होंने दैनिक भास्कर से साझा किया। 9 जनवरी की शाम लगभग 5:30 बजे चारों पैंगोंग झील पर थे। रात में आसपास ही रुकने का प्लान था। फिर सोचा कि लेह में रुक जाएंगे, बाद में तय हुआ कि सीधे मनाली चलेंगे। रास्ते में एक व्यक्ति से पूछा तो उसने रास्ता तो बताया, लेकिन सभी युवकों को गूगल मैप लगाने की सलाह दी। उसी के आधार पर वह आगे बढ़ने लगे। लेह से लगभग 125 किलोमीटर पहुंचे थे, रात के लगभग ढाई बज रहे थे। सड़क पर बर्फ ही बर्फ थी। रास्ता पूरी तरह से बंद था। ये क्षेत्र सरचू से 40 किलोमीटर पहले था। वहां तक पहुंचना भी मुश्किल था। ऐसे में कार को सड़क पर ही रोक कर सुबह का इंतजार करते रहे। मोबाइल का नेटवर्क न होने से किसी से संपर्क भी नहीं हो पा रहा था। जैसे-तैसे रात गुजारी। उसके बाद 10 जनवरी को भी यही हाल रहा। कभी नहीं भूल सकते वो रातें
उन्होंने परिजनों को बताया-वो 3 रातें हम कभी नहीं भूल सकते। आसपास कोई नजर नहीं आ रहा था। कार से बाहर निकलकर देखा ताे दूर-दूर तक एक इंसान तक नजर नहीं आया। जहां तक हमारी नजर जा रही थी, वहां सिर्फ बर्फ ही बर्फ दिखाई दे रही थी। काफी डर लग रहा था। एक-दूसरे से बातें कर समय काटी। इन चारों के पास कार में जो सबसे खास चीज थी, वह चूल्हे वाला छोटा सिलेंडर था। जिससे पानी गर्म कर-कर पीते रहे और पास में रखे कुछ चिप्स और बिस्किट खाते रहे। पत्थर पर लिखा दिया ‘हेल्प मी’
जब आगे-पीछे जाने का कोई उपाय न सूझा तो कार में ही सुबह से लेकर रात गुजारी। ठंड लगने पर बीच-बीच में कार का हीटर चलाते रहे। 11 जनवरी को सुबह गाड़ी से बाहर आए, लेकिन पहले जैसी ही स्थिति होने के कारण कोई फायदा न हुआ। फिर तय किया कि वापस लेह की तरफ जितना चल सकते हैं, पैदल ही चलेंगे। कार को वहीं छोड़ दिया। सड़क किनारे पड़े एक पत्थर को उठाकर बीच में रखा और उस पर ‘हेल्प मी’ लिख दिया। उसके बाद लगभग 15 किलोमीटर पैदल चले। वहां एक झोपड़ी मिली। उसमें 11 जनवरी की पूरी रात काटी। अब जानिए 9 से 13 जनवरी के बीच क्या-क्या हुआ… 9 जनवरी: शाम 5 बजे चारों युवकों ने अपने परिजनों से बात की। इसके बाद ये लेह के लिए निकल गए। वहां पर खारू के पास इन्हें मनाली का बोर्ड दिखा। ये उस रास्ते पर चलने लगे। 10 जनवरी: पंग में ही रुक गए। 11 जनवरी: मनाली के लिए निकले। वहां आगे रास्ता बंद होता। सरचू से आगे निकलकर फिर वापस लौटते। वहां पर नाकीला के पास बर्फ से इनकी गाड़ी 20 फीट नीचे फिसल जाती। गाड़ी फंस जाती। बर्फ के बीच ही गाड़ी में हीटर चलाकर रात काटी। 12 जनवरी: अगला दिन भी हीटर के सहारे ही गुजरा। गाड़ी का डीजल खत्म होने के बाद एकमात्र सहारा हीटर भी चलना बंद हो गया। फिर पैदल चलने का प्लान बनाया। 13 जनवरी: करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर व्हिस्की नाला के पास दिखी झोपड़ी तक पहुंचे। रातभर उसी में गुजारी। इस बीच लद्दाख पुलिस भी इनको तलाशते हुए वहां पर पहुंच जाती है। सभी को रेस्क्यू कर वापस लेह लाया गया। ———————- यह खबर भी पढ़ें… लद्दाख में 4 दिन लापता रहे आगरा के 4 दोस्त:रास्ता भटके, कार बर्फ में फिसलकर 20 फीट गहरी खाई में गिरी, 20km पैदल चले लद्दाख में 4 दिन पहले लापता हुए आगरा के चार दोस्तों की लोकेशन मिल गई है। चारों सुरक्षित हैं, और पुलिस के पास हैं। परिवार के लोग उन्हें लाने लद्दाख रवाना हुए हैं। उन्हें कल, बुधवार को वापस लाया जाएगा। लद्दाख पुलिस के अनुसार, चारों दोस्त 9 जनवरी की शाम लगभग 5:30 बजे कार से पैंगोंग झील से रवाना हुए थे। उसी दिन उन्होंने अपने परिजनों से बातचीत भी की थी। इसके बाद उनसे संपर्क टूट गया। अगले दिन जब कोई बात नहीं हुई तो परिवार ने पुलिस में मिसिंग कम्प्लेन की। पुलिस ने चारों को सुरक्षित खोज निकाला।पूरी खबर पढ़ें