कानपुर मेट्रो परियोजना में एक और महत्वपूर्ण चरण शुरू हो गया है। कॉरिडोर-1 (आईआईटी–नौबस्ता) के तहत कानपुर सेंट्रल से स्वदेशी कॉटन मिल रैंप तक लगभग 3 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड सेक्शन में थर्ड रेल इंस्टॉलेशन का कार्य आरंभ कर दिया गया है। इससे पहले, बारादेवी से नौबस्ता तक लगभग 5.3 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड सेक्शन में थर्ड रेल सिस्टम का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इस अंडरग्राउंड स्ट्रेच में ‘अप-लाइन’ टनल के भीतर ट्रैक निर्माण का कार्य पहले से ही प्रगति पर है। परियोजना को तय समयसीमा में पूरा करने और समय बचाने के उद्देश्य से ट्रैक निर्माण के साथ-साथ ही थर्ड रेल इंस्टॉलेशन का कार्य भी शुरू किया गया है। वर्तमान में, थर्ड रेल सिस्टम के तहत सबसे पहले ब्रैकेट्स लगाए जा रहे हैं। ये ब्रैकेट्स भविष्य में बिजली आपूर्ति के लिए थर्ड रेल को सहारा प्रदान करेंगे। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, ‘अप-लाइन’ टनल में ट्रैक और थर्ड रेल इंस्टॉलेशन का कार्य पूरा होते ही कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता तक मेट्रो ट्रेनों की टेस्टिंग प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यह यात्रियों के लिए मेट्रो सेवा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। कानपुर मेट्रो में पारंपरिक ओवर हेड इक्विपमेंट (ओएचई) के बजाय 750 वोल्ट डीसी थर्ड रेल ट्रैक्शन सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। इस प्रणाली में ट्रैक के समानांतर बिछी हुई थर्ड रेल से मेट्रो ट्रेनों को बिजली की आपूर्ति होती है। यह तकनीकी रूप से अधिक भरोसेमंद होने के साथ-साथ शहरी सौंदर्य के लिए भी बेहतर मानी जाती है। थर्ड रेल सिस्टम का एक प्रमुख लाभ यह है कि इसका रखरखाव कम होता है। इसमें पतंगबाजी या बाहरी कारणों से बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका नहीं रहती। इसके अतिरिक्त, खुले तार न होने के कारण शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर अधिक साफ-सुथरा और आकर्षक दिखाई देता है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा- कानपुर मेट्रो की टीम कॉरिडोर-1 के बैलेंस सेक्शन में कार्य को पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रही है। सिग्नलिंग, टेलिकॉम, इलेक्ट्रिकल, ट्रैक्शन सहित सभी विभागों के सिस्टम इंस्टॉलेशन कार्य सुनियोजित ढंग से प्रगति पर हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही कानपुरवासियों को नौबस्ता तक मेट्रो सेवा का लाभ मिल सकेगा।