गोरखपुर के चौरीचौरा क्षेत्र में 29 मार्च 2025 की देर रात गंडासे से गला रेतकर मां-बेटी की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस घटना के 10 माह बाद भी पुलिस हत्यारे का पता नहीं लगा पाई। इस मामले में नामजद तीन आरोपियों सहित छह संदिग्ध का गाजियाबाद स्थित संस्थान में पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसी महीने इसकी रिपोर्ट भी आ जाएगी। इस रिपोर्ट से डबल मर्डर के पर्दाफाश में मदद मिल सकती है। पुलिस का ऐसा दावा है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वादी मुकदमा मृतका पूनम की बड़ी बेटी खुशबू, गांव के कोटेदार सूरज, उसके बेटे सुरेंद्र व संजय के साथ ही दो अन्य संदिग्ध सदानंद और अजय कुमार का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया। करीब एक सप्ताह तक गाजियाबाद में यह प्रक्रिया चली है। इस दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। 100 से अधिक लोगों से पूछताछ के बाद भी खाली हाथ पुलिस का कहना है कि अभी तक 100 से अधिक लोगों से इस केस में पूछताछ हुई, लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली। जांच पड़ताल के बाद इस केस से जुड़े 6 संदिग्ध सवालों के घेरे में आए। जिनका कोर्ट से आदेश मिलने के बाद पॉलीग्राफ टेस्ट गाजियाबाद में कराया गया है। हत्यारा जो भी है, वह बहुत ही शातिर है। उसने कोई साक्ष्य घटना स्थल पर नहीं छोड़ा, जिसकी मदद से उस तक पहुंचा जा सके। पुलिस की 8 टीमें कई महीने जांच करने के बाद भी कोई साक्ष्य एकत्रित नहीं कर पाई। अब पुलिस को पॉलीग्राफ टेस्ट रिपोर्ट से काफी उम्मीद है। अगर टेस्ट रिपोर्ट से भी मदद नहीं मिली, तब इस केस का पर्दाफाश कर पाना बेहद मुश्किल होगा। 29 मार्च को मां-बेटी की गंडासे से की गई थी हत्या चौरीचौरा थाना क्षेत्र के शिवपुर चकदह गांव 29 मार्च की देर रात करीब 1:30 बजे पूनम (45) और उनकी बेटी अनुष्का (13) की गंडासे से मारकर हत्या की गई थी। सूचना पर पहुंची चौरीचौरा पुलिस ने घटना स्थल पर छानबीन की थी। तब पूनम का एंड्रॉयड मोबाइल वहां नहीं मिला था। जांच में पता चला था कि घटना को अंजाम देने के बाद हत्यारे पूनम का मोबाइल लेकर भाग गए थे। बाद में वह मोबाइल भी गांव के एक खेत में मिल गया था। घटना के समय आरोपियों ने पूनम की बड़ी बेटी खुशबू को दूसरे कमरे में बंद कर दिया था। खुशबू ने अपने कमरे की दरवाजे के छेद से आरोपियों को देखा था। उसकी तहरीर पर गांव के ही कोटेदार संजय उर्फ शैलेंद्र व उसके पिता और भाई के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था। शैलेंद्र को घटना के बाद ही घर से सोते समय गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भिजवाया था। 90 दिन में नहीं लगी चार्जशीट, छूट गया कोटेदार हत्या की घटना 29 मार्च की देर को हुई थी। इसके 90 दिन बाद भी चौरीचौरा पुलिस इस मामले में चार्जशीट नहीं दाखिल कर पाई। इस कारण मुख्य आरोपी संजय उर्फ शैलेंद्र को तीन महीने में ही सिविल कोर्ट से जमानत मिल गई। वह जेल से बाहर आ गया। पुलिस का कहना था कि संजय के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिल पा रहे थे, इसलिए चार्जशीट नहीं दाखिल की गई थी। हत्या के बाद जब पुलिस कोटेदार संजय के घर पहुंची थी, तब वह कमरे में सोया मिला था। सीसीटीवी कैमरे में भी उसके बाहर जाने का कोई साक्ष्य नहीं मिला था। इस संबंध में एसपी उत्तरी ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि मां-बेटी हत्या प्रकरण में कुछ संदिग्ध का पॉलीग्राफ टेस्ट करा लिया गया है। इस माह गाजियाबाद से इसकी रिपोर्ट आने की उम्मीद है। इससे काफी मदद मिल सकती है। रिपोर्ट आने के बाद उसी दिशा में जांच पड़ताल की जाएगी।