माघ मेले में इस बार साधु-संतों और कल्पवासियों के बीच अनोखा आकर्षण देखने को मिल रहा। कोई अपनी विचित्र वेशभूषा, तो कोई अनूठी साधना के चलते चर्चा में है। इनके अलावा इस बार माघ मेले में साधु-संतों के बीच एक अनोखा चेहरा छाया है। वह हैं गूगल गोल्डन बाबा का, जिनका असली नाम मनोजानंद महाराज है। गोल्डन बाबा सिर से लेकर पैर तक सोने-चांदी की ज्वेलरी से सजे दिखते हैं। चांदी के बर्तनों में भोजन और जल ग्रहण करते हैं। हाथों में सोने के कंगन-चेन लहराते हैं। पांचों उंगलियों में देवी-देवताओं वाली सोने की अंगूठियां चमकती हैं। गले में सोने-चांदी का शंकर, रुद्राक्ष की मालाएं हैं, जिनमें भी सोने की जड़ाई की गई है। सिर पर चांदी का मुकुट है। जिस पर सीएम योगी की तस्वीर जड़ी हुई है। बाबा करीब 5 किलो सोना पहनते हैं। पहले जानिए गूगल गोल्डन बाबा के बारे में कानपुर में रहने वाले स्वामी श्री मनोजानंद महाराज को लोग अब ‘गूगल गोल्डन बाबा’ के नाम से जानते हैं। वह अपनी वैभवशाली वेशभूषा के लिए मशहूर हैं। बाबा ने बताया- मैं अपने शरीर पर करीब 5 करोड़ रुपए के सोने-चांदी के आभूषण धारण करता हूं। मेरे सिर पर भारी चांदी का मुकुट है, गले में सोने-चांदी से जड़ा शंख है। दसों उंगलियों में देवी-देवताओं की आकृतियों वाली सोने की अंगूठियां हैं। मेरे हाथ में हमेशा शुद्ध सोने से बने ‘लड्डू गोपाल’ की प्रतिमा रहती है, जिन्हें मैं अपनी सुरक्षा का आधार मानता हूं। सीएम योगी के लिए लिया है ‘कठोर व्रत’
गूगल गोल्डन बाबा केवल अपनी दौलत के लिए ही नहीं, सीएम योगी के प्रति अपनी अटूट आस्था के लिए भी सुर्खियों में हैं। वह सीएम योगी के ‘जबरा फैन’ हैं और उन्होंने एक बड़ा संकल्प लिया है। बाबा का कहना है- जब तक योगी देश के प्रधानमंत्री नहीं बन जाते, तब तक मैं नंगे पैर रहूंगा। इस संकल्प से पहले बाबा 5 लाख रुपए की चांदी की चप्पलें पहनते थे। लेकिन अब उन्होंने जूते-चप्पल पूरी तरह त्याग दिया है। उनके चांदी के मुकुट पर भी सीएम योगी की तस्वीर लगी है। गोल्डन बाबा माघ मेले के सेक्टर-2 में अपने शिविर में रह रहे हैं। अब पढ़िए गूगल गोल्डन बाबा से हुई बातचीत के अंश… सवाल- बाबा, आप इतना सोना धारण करते हैं, इसके पीछे कोई विशेष कारण?
जवाब- यह कोई संकल्प नहीं, हमारा शौक है। हम क्षत्रिय हैं। क्षत्रिय का शौक होता है शस्त्र और सोना। आदिकाल से देख लीजिए, महाभारत काल में भी बड़े-बड़े क्षत्रिय सोना धारण करते थे। हमारे राजा कर्ण क्षत्रिय थे, वे भी सोना पहनते थे। उन्हीं की परंपरा में कर्णफूल बनाए गए। हम अपने क्षत्रिय समाज का नाम रोशन करने और परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए सोना धारण करते हैं। इसमें कोई घमंड नहीं है। सवाल- संत भभूत धारण करते हैं, लेकिन आपने सोना धारण किया, क्यों?
जवाब- हम क्षत्रिय हैं और यह हमारा शौक है। शौक बड़ी चीज होती है। किसी को जहाज उड़ाने का शौक होता है, किसी को पतंग उड़ाने का। हमें सोना पहनने का शौक है। यह पूरी तरह हमारा व्यक्तिगत शौक है। सवाल- आप इस समय कितने किलो सोना पहने हैं?
जवाब- हम कभी तौलते ही नहीं हैं। शौक को तौला नहीं जाता। बाकी चार-पांच किलो जो भी होगा, वह तो Google में चल ही रहा है। आप वहीं से पता कर लीजिए। सवाल- आपके वस्त्र, मुकुट और पीठ पर योगी की तस्वीर लगी है। क्या कारण है?
जवाब- यह बहुत सुंदर प्रश्न है। कोरोना काल में बड़े-बड़े मंत्री घर से बाहर नहीं निकल रहे थे। लेकिन, हमारे महाराजजी गांव-गांव, घर-घर जाकर औषधि बांट रहे थे। यहां तक कि हमारे पिताजी के अंतिम संस्कार में भी वे नहीं जा सके, क्योंकि जनता की सेवा में लगे थे। संत हृदय होता है, जो लोगों की चिंता करता है। उन्हें रोगमुक्त और शोकमुक्त करता है। उनके कार्यों से हम अत्यंत प्रभावित हुए। अयोध्या में प्रभु श्रीराम 550 साल बाद आए। पहले भी आ सकते थे, लेकिन जब योगी का नाम शासन में तय हुआ, तभी प्रभु आए। योगीजी हनुमानजी का अवतार हैं। जब हनुमानजी आए, तब प्रभु राम आए। न सुप्रीम कोर्ट लाया, न किसी और ने- प्रभु अपनी इच्छा से आए, क्योंकि संत का शासन था। अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा योगीजी के कार्यकाल में हुई। इसका पूरा श्रेय योगीजी को जाता है। सवाल- आपके हाथ में सोने के लड्डू गोपाल भी हैं। इसका क्या महत्व है?
जवाब- हम सदैव इनके साथ रहते हैं। इन्हीं की ऊर्जा से हमारा सारा काम चलता है। हमारे ऊपर 4 बार हमले हो चुके हैं, लेकिन भक्ति का प्रताप है कि हमारा बाल भी बांका नहीं हुआ। मंत्र जाप, दृढ़ विश्वास यही हमारी शक्ति है। हम प्रभु पर अंधविश्वास नहीं, दृढ़ विश्वास करते हैं। अपराधी बड़े-बड़े गैंग से थे, लेकिन सब पकड़े गए। यह प्रभु की महिमा है। सवाल- इतना सोना पहनने के बावजूद आप बिना सुरक्षा के कैसे रहते हैं?
जवाब- हमें किसी सुरक्षा की जरूरत नहीं। हम प्रभु पर विश्वास करते हैं। सुदर्शन चक्रधारी से बड़ा कोई सुरक्षाधारी नहीं होता। दो बार हमें सुरक्षा देने की बात हुई, लेकिन हमने मना कर दिया। हाल ही में हम अयोध्या भी गए थे। प्रभु ही सब कुछ संभाल रहे हैं। किसी न किसी रूप में हमें संकेत देते हैं। क्यों पड़ा ‘गूगल गोल्डन बाबा’ नाम? हमने उनसे उनके अनोखे नाम के बारे में पूछा। इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- मेरा नाम गूगल गोल्डन बाबा इसलिए है, क्योंकि आप जैसे ही गूगल पर मुझे ढूंढेंगे, मैं तुरंत प्रकट हो जाऊंगा। बाबा पिछले 20 साल से इसी वेशभूषा में रह रहे हैं। पिछले 8 साल से लगातार माघ मेले में शिरकत कर रहे। ———————- ये खबर भी पढ़ें… सतुआ बाबा बोले- जलने वालों पर घी डालूंगा, साधु का कांटे पर तप, माघ मेले में कल सबसे बड़ा स्नान प्रयागराज माघ मेले का आज 16वां दिन है। मेले में साधु-संतों के अलग-अलग अंदाज श्रद्धालुओं को खूब भा रहे हैं। एक साधु बिना कपड़ों के कांटों पर लेटे नजर आए। श्रद्धालु उनके साथ सेल्फी लेते दिखे। आज महाकुंभ में चर्चा में रहीं हर्षा रिछारिया भी मेले में पहुंचेंगी। पढ़ें पूरी खबर…