बांदा में हनुमंत कथा संपन्न,ब्रजभूषण बोले-दबदबा है और दबदबा रहेगा:धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- बांदा को छोटी काशी और यहां की नदी को छोटी गंगा कहा जाता है

बांदा में चल रही हनुमंत कथा का आज 5वें दिन संपन्न हुई। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री दोपहर एक बजे से कथा का शुभारंभ राम भजन के साथ हुआ था। धीरेंद्र शास्त्री के साथ मंच पर अयोध्या के हनुमानगढ़ी के महंत राजूदास भी मौजूद रहे। कथा शुरू होने से पहले धीरेंद्र शास्त्री ने गाना गाया- “डाले रहो दरबार में धक्का-मुक्का, अमीरों के खाओ। एक दिन ऐसा आएगा कि तुम ही अमीर बन जाओगे। कोई जल्दी अमीर बनेगा, कोई देर से, लेकिन हमारे बालाजी का भक्त एक दिन सेठ बनेगा।” धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- बांदा में जो मेला लगा, वह किसी महाकुंभ से कम नहीं रहा। बजरंगबली का ऐसा आशीर्वाद बरसा कि यह आयोजन सदियों तक बुंदेलखंड के इतिहास में दर्ज रहेगा। चारों ओर केवल श्रद्धालु ही श्रद्धालु नजर आ रहे हैं। लोग दर्शन के लिए 5-5 किलोमीटर तक पैदल चल रहे हैं। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- आजकल वैज्ञानिक मंगल ग्रह पर जीवन खोज रहे हैं, लेकिन हम लोग जीवन में मंगल खोज रहे हैं। जीवन में मंगल कहां से मिलेगा, एक उपाय है- बताएं कहां? जहां से बृजभूषण आएं हैं, अयोध्या से। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- साधु का नियम यदि पक्का हो तो वही साधु कहलाता है। लंगोट का पक्का और नियम पक्का होना साधु की पहचान है। साधु को केवल एक ही भय रहता है कि वह बदनाम न हो जाए। यदि साधु को साधना करनी है तो उसे भोजन और भजन दोनों पर नियंत्रण रखना चाहिए। धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि भूत क्या है। भूत सबसे सामान्य श्रेणी का होता है, बिल्कुल साधारण व्यक्ति की तरह। जब कोई साधारण व्यक्ति मर जाता है और अगले जन्म तक के बीच का समय आता है, तो वह भूत कहलाता है। प्रेत भूत से बेहतर गुणवत्ता का होता है, जैसे पार्षद के बाद मेयर। कहा कि इस पर विवाद मत कीजिए, क्योंकि यह गुरुजी की बात है। प्रेत बनकर वे लोगों को सताते हैं। पिशाच को प्रेत का बाप समझिए, उसकी ताकत बहुत ज्यादा होती है और वह शक्तिशाली होता है। जो व्यक्ति तामसिक गुण से मरता है, वह पिशाच बनता है। धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि नाम में से पूछो कौन सा लें। कोई भी नाम लो, चाहे महावीर कहो, बजरंगबली कहो, राम जी कहो, श्याम जी कहो। बस टोपी वालों के नाम मत लेना। अपने बालक के लिए जैसे चाहो, वैसे नाम ले लो। धीरेंद्र शास्त्री ने बताया- बांदा संकट मोचन की नगरी है, यह खत्री पहाड़ में स्थित विद्यावासिनी की नगरी भी है और महर्षि बामदेव की नगरी भी कही जाती है। बुरा न मानें, तो एक बात कहें—बांदा को छोटी काशी कहा जाता है और यहां की के नदी को छोटी गंगा। हनुमंत कथा से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…