सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के चौथे दिन उसकी कार को गड्ढे से निकाल लिया गया। मंगलवार शाम 6:40 बजे क्रेन की मदद से कार को बाहर निकाला गया। एनडीआरएफ के 30 कर्मचारियों की टीम ने कार निकालने के लिए करीब साढ़े छह घंटे मशक्कत की। सुबह 11 बजे एनडीआरएफ की टीम सेक्टर-150 (घटनास्थल पर) पहुंची। वहां स्टीमर बोट से 12 लोगों की 2 टीमें पानी के अंदर गईं। करीब एक घंटे तक मौका-मुआयना किया। लेकिन, गाड़ी का पता नहीं चला। इसके बाद एनडीआरएफ की टीम ने सोनार साउंड और नेवीगेशन मशीन की मदद से बेसमेंट की गहराई का पता लगाया। इसी की मदद से कार को डिटेक्ट किया। फिर हाइड्रोलिक क्रेन की मदद से कार को बाहर निकाल लिया गया। अब कार की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। वहीं, इस मामले में नामजद बिल्डर अभय कुमार को नॉलेज पार्क इलाके से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इंजीनियर की मौत होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि जवाबदेही न होने के कारण इंजीनियर की जान गई है। पहले 3 तस्वीरें देखिए… एसआईटी ने शुरू की जांच, पिता से बात की
इस मामले की जांच के लिए एसआईटी के अफसर मंगलवार को नोएडा पहुंचे। दोपहर में करीब 12 बजे जांच अधिकारी नोएडा प्राधिकरण के दफ्तर पहुंचे। 12:30 बजे मीटिंग शुरू हुई। बैठक में प्राधिकरण के सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। उनके अलावा ADG मेरठ भानु भास्कर, पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, मेरठ मंडल आयुक्त भानु चंद गोस्वामी, डीएम मेघा रूपम भी शामिल हुईं। मृतक के पिता को बुलाया गया। आधे घंटे तक एसआईटी के अधिकारियों ने उनसे बातचीत की। हादसा कब और कैसे हुआ, इस बारे में पूछा। उसके बाद उन्हें वापस भेज दिया गया। फिर SDRF के अधिकारियों को बुलाया गया। उनसे हादसे के बारे में पूछताछ की गई। 2:30 बजे बैठक खत्म हुई। अब घटना के बारे में जानिए… 16 जनवरी की रात करीब 12 बजे युवराज मेहता (27) अपनी ग्रैंड विटारा कार से नोएडा के सेक्टर-150 टाटा यूरिका पार्क जा रहे थे। सेक्टर-150 मोड़ पर यूटर्न था। कोहरे की वजह से उन्हें आगे का रास्ता नहीं दिखा और उनकी कार पानी से भरे प्लॉट के गड्ढे में गिर गई। मॉल के बेसमेंट के लिए यहां 30 फीट का गड्ढा खोदा गया था। युवराज किसी तरह डूबती कार से बाहर निकलकर उसकी छत पर चढ़ गए। 12.20 बजे उन्होंने अपने पिता को फोन करके हादसे की जानकारी दी। पिता ने तुरंत डायल-112 पर घटना की सूचना दी। कुछ ही मिनट में पिता वहां पहुंच गए। करीब 30 मिनट बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीमें पहुंची। रात 1.15 बजे एसडीआरएफ की टीम भी पहुंची। NDRF के पहुंचने से पहले डूब चुका था
उस समय घने कोहरे की वजह से युवराज की सिर्फ आवाजें ही सुनाई दे रही थी। युवराज करीब 80 मिनट तक चिल्लाते रहे कि कोई मुझे बचा लो। कार जल्दी ही डूब जाएगी। लेकिन कोई उनकी मदद नहीं कर सका। फिर पौने दो बजे के करीब गड्ढे भरे पानी में कार समेत युवराज डूब गए। रात 1.55 बजे पर एनडीआरएफ की टीम गाजियाबाद से मौके पर पहुंची। सुबह करीब 4:30 युवराज का शव बाहर निकाला गया। घटना से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग्स से गुजर जाइए