डीएम अविनाश सिंह की कुशल नेतृत्व क्षमता और टीम मैनेजमेंट के दम पर बरेली ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार-2025 की ‘समग्र जिला विकास’ श्रेणी में बरेली का चयन स्क्रीनिंग स्तर पर कर लिया गया है। देशभर के 513 जिलों ने इस सम्मान के लिए आवेदन किया था, जिनमें से केवल 40 जिलों को ही शॉर्टलिस्ट किया गया है। उत्तर प्रदेश से बरेली के साथ हमीरपुर, हाथरस और संभल ही इस दौड़ में शामिल हो सके हैं। यह चयन जिले में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है। 11 प्रमुख योजनाओं के दम पर मिली सफलता
बरेली का यह चयन किसी एक क्षेत्र की वजह से नहीं, बल्कि 11 प्रमुख विकास योजनाओं के सफल संचालन के आधार पर हुआ है। इसमें ‘हर घर जल’, ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’, ‘आयुष्मान भारत’, ‘पीएम स्वनिधि’ और ‘पीएम विश्वकर्मा’ जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। प्रशासन ने इन योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि धरातल पर लाभार्थियों तक पहुंचाया है। पेयजल, स्वास्थ्य सुरक्षा और महिला एवं बाल कल्याण जैसे क्षेत्रों में संतुलित प्रगति ने बरेली के दावे को और भी मजबूत बना दिया है। डीएम की फील्ड विजिट और नवाचार का दिखा असर
विकास कार्यों को रफ्तार देने में जिलाधिकारी अविनाश सिंह की सक्रियता का बड़ा हाथ रहा है। नियमित समीक्षा और फील्ड विजिट के जरिए उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। ग्रामीण इलाकों में जलापूर्ति से लेकर स्ट्रीट वेंडरों के पुनर्वास और आंगनबाड़ी केंद्रों के सशक्तिकरण तक, हर मोर्चे पर बरेली ने बेहतर प्रदर्शन किया है। साथ ही, पर्यटन के क्षेत्र में लीलौर झील का सौंदर्यीकरण और नाथ नगरी कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स ने जिले को वैश्विक पहचान दिलाई है। 21 जनवरी को 15 मिनट में तय होगा बरेली का भाग्य
अब बरेली के सामने सबसे बड़ी और निर्णायक चुनौती 21 जनवरी को है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्क्रीनिंग कमेटी के सामने जिला प्रशासन को अपना प्रस्तुतीकरण देना है। कुल 15 मिनट के इस सत्र में 10 मिनट प्रेजेंटेशन और 5 मिनट सवाल-जवाब के लिए निर्धारित हैं। इसमें जिले के नवाचार, प्रशासनिक गवर्नेंस और धरातल पर आए बदलावों का पूरा खाका दिल्ली की कमेटी के सामने रखा जाएगा। पूरा जिला प्रशासन अब इस अंतिम बाधा को पार करने की तैयारियों में जुटा है। यूपी के लिए नजीर बन सकता है बरेली का मॉडल
यदि बरेली इस अंतिम चरण को सफलतापूर्वक पार कर लेता है, तो यह पूरे उत्तर प्रदेश के लिए सुशासन का एक बड़ा उदाहरण होगा। प्रधानमंत्री पुरस्कार मिलना न केवल एक सम्मान है, बल्कि यह जिले की नीतिगत सोच और प्रशासनिक दक्षता की राष्ट्रीय मुहर होगी। जानकारों का कहना है कि बरेली जिस आत्मविश्वास के साथ इस दौड़ में आगे बढ़ा है, उसने साबित कर दिया है कि ‘नाथ नगरी’ अब केवल दावों में नहीं, बल्कि काम के दम पर अपनी पहचान बना रही है।