उत्तरायणी कौथिग- आठवें दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संगम:पहाड़ी लोकसंगीत और रंगारंग प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मोहामन

लखनऊ में आयोजित उत्तरायणी कौथिग 2026 के आठवें दिन पर्वतीय संस्कृति, लोकसंगीत और रंगारंग प्रस्तुतियों का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध लोकगायक चंद्रप्रकाश ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकगायक चंद्रप्रकाश ने मंच संभालते ही अपने सुरों से दर्शकों को बांध लिया। उन्होंने ‘मैं जांछू कमला काली गंगा पारा…’, ‘सोला सोल्यानी त्यार गाला जंजीरा…’, ‘तिलगा तेरी लंबी लटी…’ और ‘कां हराई आज म्यार पहाड़ रीत-रिवाज’ जैसे लोकप्रिय लोकगीत प्रस्तुत किए, जिन पर दर्शक देर तक झूमते रहे। चंद्रप्रकाश की आवाज कभी घाटियों में गूंजती थी पर्वतीय महापरिषद के महासचिव महेंद्र सिंह रावत ने बताया कि चंद्रप्रकाश की आवाज कभी उत्तराखण्ड की सुदूर घाटियों में गूंजती थी। कौथिग के आयोजकों ने उन्हें खोजकर लखनऊ के मंच तक पहुंचाया, जहां से उन्हें पूरे उत्तराखण्ड में पहचान मिली। पिछले 13 वर्षों से वे लगातार कौथिग मंच पर अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का दिल जीत रहे हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में क्षेत्रीय शाखाओं की नृत्य प्रस्तुतियां और झोड़ा प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। झोड़ा प्रतियोगिता में पंतनगर से सुधा चंदोला, इंदिरा नगर से दीपा पाण्डेय और सोनू जोशी की टीमों ने दमदार प्रदर्शन किया। कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों ने तालिया से सराहा इसके साथ ही, छपेली प्रतियोगिता ‘झूमिगो सीजन-4’ में गोमती नगर, तेलीबाग, महिला प्रकोष्ठ गोमती नगर और माही वेलफेयर सोसाइटी की टीमों ने हिस्सा लिया। ‘पहाड़ की आवाज’ के दूसरे राउंड के लिए बबली भंडारी, विनीता तिवारी, बलवंत वाणगी, दिव्यांशु जोशी और हेमा पंचवाल का चयन किया गया।हल्द्वानी से आए म्यूजिकल ग्रुप ने ढोलक, तबला, बांसुरी, कीबोर्ड और ऑक्टोपैड के माध्यम से मंच को संगीतमय बनाए रखा। लोकगाथा पर आधारित नृत्य-नाटिका ‘माधो सिंह’ की प्रस्तुति भी दर्शकों द्वारा सराही गई।