बलरामपुर के एमएलकेपीजी कॉलेज सभागार में गणतंत्र दिवस के अवसर पर सोमवार रात जिला प्रशासन के निर्देशन में एक भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देशभक्ति, सामाजिक सरोकार और प्रेम-संवेदना से ओतप्रोत कविताओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. अरुण प्रकाश पाण्डेय, डॉ. ओमप्रकाश मिश्र, महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जे.पी. पाण्डेय और एडीएम ज्योति राय ने दीप प्रज्वलन तथा मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। प्राचार्य प्रो. जे.पी. पाण्डेय और डॉ. रमेश शुक्ला ने कवियों का स्वागत किया। कवि सम्मेलन में अरुण प्रकाश पाण्डेय, डॉ. ओमप्रकाश मिश्र, कुमार निर्मेलेंदु, कन्हैया लाल मधुर, अवधेश सिंह ‘समीर’, डॉ. सुबहान खाँ, महमूदुल हक, सर्वेश सिंह, उवैश मोनिष सहित कई कवियों और शायरों ने अपनी एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कीं। एक कवि की पंक्तियों “रात-दिन गुनगुनाना जरूरी नहीं, देखकर मुस्कुराना जरूरी नहीं, जो भी बातें हैं तेरे-मेरे बीच की, हर किसी को बताना जरूरी नहीं” पर सभागार तालियों से गूंज उठा। हिंदी की गरिमा पर प्रस्तुत रचना— “सभी भाषाओं में रखती अलग पहचान है हिंदी, हमारे और तुम्हारे प्यार का बलिदान है हिंदी” ने श्रोताओं में विशेष उत्साह भरा। एक युवा कवि की रचना “करे जब प्रश्न रोती द्रौपदी पूरी सभा से, बताओ न्याय के देवों हो चुप अन्याय पर क्यों हो” ने सामाजिक चेतना को झकझोर दिया। वरिष्ठ कवि की पंक्तियों “लगता है फिर से बहार आ गई वापस, वो आ गया तो सारी वीरानी चली गई” और शेर “उसकी आंखों में मोहब्बत का नशा देखा है, ऐसा लगता है कि मैंने खुदा देखा है” ने माहौल को भावुक कर दिया। इस कवि सम्मेलन के माध्यम से गणतंत्र दिवस का उत्सव साहित्य, संस्कृति और देशप्रेम के रंगों में सराबोर नजर आया। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।