KGMU के डॉक्टरों का UGC बिल को लेकर जोरदार प्रदर्शन:जमकर नारेबाजी की, बोले- इलाज के समय हम नहीं देखते किसी की जाति

KGMU कैंपस के कुलपति कार्यालय में हंगामे के बाद FIR दर्ज न होने को लेकर गुस्सा डॉक्टरों को बुधवार को प्रदर्शन करने का नया मुद्दा मिल गया। कैंपस में बड़ी संख्या में सीनियर डॉक्टरों की मौजूदगी में कुलपति कार्यालय के पास UGC के नए नियमों को लेकर बड़ा प्रदर्शन हुआ। इस दौरान जमकर नारेबाजी भी हुई। पोस्टर और बैनर लेकर पहुंचे डॉक्टरों ने UGC बिल के खिलाफ आवाज बुलंद की। प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि यह नीति कैंपस में जाति-आधारित भेदभाव को कम करने के बजाय बढ़ावा देने वाली हो सकती है, ऐसे में इसको सरकार को वापस लेना ही पड़ेगा। नहीं तो व्यवस्था पूरी तरह से खराब हो सकती है। मनमाने तरीके से थोपा गया कानून डॉ. समीर मिश्रा ने कहा- इस बिल से तो यह पता चल रहा है कि पहले से ही तय कर दिया गया है कि सामान्य वर्ग का शख्स अत्याचार करेगा ही करेगा। इस बिल में सामान्य वर्ग को कहीं जगह ही नहीं मिली है। ऐसे में इस बिल को वापस लेना चाहिए। साथ ही यदि शिक्षण संस्थानों के लिए कोई कानून बनाना है तो उसमें वहां के शिक्षक और कर्मचारियों को भी साथ लेकर कानून बनाना चाहिए। न्याय के खिलाफ है ये बिल डॉ.अमिय अग्रवाल ने कहा- सरकार इस बिल को क्यों लाई है। यह तो समझ के परे है, लेकिन इस तरह का एक कानून कम्युनल वायलेंस बिल पहले कांग्रेस सरकार लाना चाह रही थी, उसी का यह स्वरूप है। इस कानून के तहत सामान्य वर्ग के व्यक्ति को नैसर्गिक न्याय का अधिकार नहीं दिया गया है। ये बिल तर्क संगत नहीं डॉ.नवनीत चौहान ने कहा- यह कानून विधि और तर्क संगत नहीं है। इसमें यह मान लिया गया है कि सामान्य वर्ग का शख्स ही गलत करने वाला है, ऐसे में तो कुछ कहा ही नहीं जा सकता। यह कानून वापस होना चाहिए।
डॉ. मनीष बाजपेयी ने कहा- इस बिल से सिर्फ एक बात पता चलती है कि यह बिल सामान्य वर्ग के खिलाफ है। ऐसे में संशोधन बेहद जरूरी हैं। प्रो.विभा सिंह ने कहा- हम इस बिल का विरोध करते हैं और सरकार से इस कानून को वापस लेने की अपील करते हैं। डॉक्टर इलाज करते समय जाति-धर्म नहीं देखता डॉ.संदीप तिवारी ने कहा- जब समाज में समरसता आ रही है, तब इस तरह का नियम आया है, जो उचित नहीं है, यह भेदभाव पैदा करने वाला है। हम सामान्य वर्ग से हैं, हमने कभी भी इलाज करते समय किसी की जाति और धर्म को नहीं देखा। ऐसे में सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ यूजीसी का नया नियम अन्यायपूर्ण है। दूसरे पक्ष ने दिया ये तर्क KGMU शिक्षक संघ के महासचिव डॉ. संतोष कुमार ने कहा- हिन्दू राष्ट्र निर्माण के संकल्प के लिए यदि जातिगत भेदभाव करने की मंशा नहीं है। सरकार पर विश्वास है, तो UGC द्वारा जारी “उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु विनियम, 2026” का विरोध करने का कोई औचित्य नहीं है। जहां तक सवर्णों को कानून का दुरुपयोग और झूठी शिकायत का डर है, उसके लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा-217 में कठोर दंड का प्रावधान है।