सहारनपुर जिले की सरसावा नगर पालिका परिषद की बोर्ड बैठक में उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब महज दो मिनट के भीतर लगभग 62 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट पारित कर दिया गया। इस त्वरित कार्रवाई से नाराज 11 विपक्षी सभासदों ने जोरदार हंगामा किया और बैठक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नगर पालिका परिसर में धरने पर बैठ गए। विपक्षी सभासदों ने आरोप लगाया कि किसी भी एजेंडे पर विस्तृत चर्चा नहीं की गई और न ही उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया गया। उनका कहना था कि 14 सभासदों के बहुमत के आधार पर करोड़ों रुपये के प्रस्ताव जल्दबाजी में पारित किए गए, जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विरुद्ध है। विरोध प्रदर्शन के दौरान सभासदों ने अधिशासी अधिकारी और पालिकाध्यक्ष पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी भी की। धरने में राजेश चावला, राकेश साहनी, संदीप सैनी (नीलू), सौरभ कश्यप और डॉ. सचिन चौधरी सहित कई सभासद शामिल थे। उन्होंने कहा कि बिना चर्चा के बजट पारित करना पूरी तरह असंवैधानिक है और इससे जनता के हितों की अनदेखी होती है। सभासदों ने आरोप लगाया कि बोर्ड बैठक को केवल एक औपचारिकता बना दिया गया, जबकि इतनी बड़ी धनराशि पर गंभीर विचार-विमर्श आवश्यक था। इस संबंध में, अधिशासी अधिकारी ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि पूर्व में भी कई बार बिना लंबी चर्चा के बजट पारित किए गए हैं और यह यहां की एक स्थापित परंपरा रही है। हालांकि, विपक्ष इस तर्क से सहमत नहीं हुआ और उसने इसे पारदर्शिता की कमी से जोड़ते हुए अपना विरोध जारी रखा। इस बैठक के बाद नगर पालिका की राजनीति गरमा गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्षी सभासद प्रशासनिक स्तर पर शिकायत दर्ज कराते हैं या इस मुद्दे को लेकर कोई बड़ा आंदोलन शुरू करते हैं। फिलहाल, सरसावा में बजट पारित करने के तरीके को लेकर राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है।