संत रविदास जयंती पर गूंजा बाबा साहेब का संदेश,:​रानी लक्ष्मीबाई के रूप में सजे बच्चे, ​10 किमी. लंबी रैली निकाली

शहर में संत रविदास जयंती के पावन अवसर पर श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। विभिन्न क्षेत्रों से निकाली गई भव्य रैलियों ने पूरे शहर को भक्ति और एकता के रंग में सराबोर कर दिया। इस दौरान न केवल संत रविदास के विचारों को याद किया गया, बल्कि समाज को शिक्षित और एकजुट होने का सशक्त संदेश भी दिया गया। ​विजयनगर क्षेत्र से एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसकी लंबाई लगभग 10 किलोमीटर रही। इस आयोजन का नेतृत्व कर रहे श्रवण भारती ने बताया कि इस रैली का मुख्य उद्देश्य संत रविदास जी के उस कालजयी संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है जिसमें उन्होंने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी जहाँ कोई भूखा न रहे और ऊंच-नीच का भेद न हो। ​ उन्होंने संत रविदास की पंक्तियों को दोहराते हुए कहा: ​”ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिलै सबन को अन्न। छोट-बड़ो सब सम बसै, रैदास रहे प्रसन्न।” ​श्रवण भारती ने जोर देकर कहा कि आज के समय में हम सबको एकजुट होने की आवश्यकता है ताकि हम समाज में समानता का भाव पैदा कर सकें। ​शोभायात्रा का आकर्षण वहां मौजूद बच्चों के विविध रूप रहे। विजयनगर से आई नन्ही खुशी, वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के गेटअप में बेहद आत्मविश्वासी नजर आईं। खुशी ने बताया कि वह इस किरदार को निभाकर बहुत उत्साहित हैं और इसके लिए उन्होंने कई दिनों से तैयारी की थी।
​वहीं,डबल पुलिया से आए प्रखर बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के वेश में दिखाई दिए। उनके हाथ में ‘भारत का संविधान’ की पुस्तक थी। उन्होंने अपने किरदार के माध्यम से संदेश दिया कि समाज का हर वर्ग पढ़े और आगे बढ़े। ​यात्रा के दौरान शिवम सिंह आजाद ने शिक्षा के महत्व पर विशेष जोर दिया। यह शोभायात्रा विजयनगर से शुरू होकर डबल पुलिया, शास्त्री नगर और अशोक नगर होते हुए अपने गंतव्य तक पहुँची। शिवम ने बाबा साहब अंबेडकर के विचारों को साझा करते हुए कहा कि शिक्षा हमारी सबसे बुनियादी जरूरत है। ​उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा, “चाहे आधी रोटी कम खा लेना, लेकिन अपने बच्चों को शिक्षित जरूर करना। अगर हम शिक्षित होंगे, तो अपने अधिकारों को पहचानेंगे और उन्हें हासिल करने के लिए लड़ भी सकेंगे।”