औषधीय पौधों की खेती से बढ़ेगी किसानों की आय:कानपुर देहात में उद्यमिता कार्यक्रम से ग्रामीण हुए जागरूक

कानपुर देहात के हृदयपुर गोकुला स्थित राजेंद्र सिंह शिक्षा संस्थान में ‘औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती और उससे संबंधित उद्योग’ पर एक दिवसीय उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (भारत सरकार) द्वारा प्रायोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों और स्थानीय निवासियों को पारंपरिक खेती के बजाय सुगंधित पौधों की खेती और उनके व्यवसायीकरण के लिए प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम की शुरुआत सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (FFDC), कानपुर के प्रभारी सहायक निदेशक डॉ. भक्ति विजय शुक्ला ने की। उन्होंने लेमनग्रास, सिट्रोनेला और पामारोसा जैसी फसलों के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. शुक्ला ने बताया कि इन फसलों से किसान अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं। उन्होंने भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उद्योग स्थापित करने के लिए दी जाने वाली वित्तीय सहायता और सब्सिडी योजनाओं की भी विस्तृत जानकारी प्रदान की। प्रगतिशील किसान समर सिंह भदौरिया ने खेती को लाभदायक बनाने के लिए ‘रूप परिवर्तन’ यानी प्रोसेसिंग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल फसल उगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रसंस्करण के माध्यम से ही अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। पूर्व शिक्षक आर.के. त्रिपाठी ने लेमनग्रास की खेती में मनरेगा जैसी सरकारी योजनाओं के लाभ और इससे बनने वाले विभिन्न उत्पादों के बारे में जानकारी दी। इस कार्यक्रम में 75 से अधिक किसानों और महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेष रूप से महिलाओं ने अगरबत्ती और धूपबत्ती उद्योग में गहरी रुचि दिखाई। स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ते हुए, महिलाओं ने भविष्य में इस विषय पर विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने का आग्रह भी किया। कार्यक्रम के दौरान शोभन सरकार आश्रम के श्याम सुंदर यादव “मुनीम” को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि यदि ग्रामीण युवा और महिलाएं सुगंधित तेल और सौंदर्य प्रसाधन जैसे उद्योगों से जुड़ते हैं, तो क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खुलेंगे।