डीडी पुरम स्थित बंद माकन रेस्टोरेंट में आयोजित भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल की बजट परिचर्चा में शहर के आर्थिक विशेषज्ञों और उद्यमियों का मिला-जुला रुख देखने को मिला। जहां एक ओर व्यापारियों ने एमएसएमई सेक्टर के लिए दोगुने फंड और इनकम टैक्स रिटर्न की डेडलाइन बढ़ने का दिल खोलकर स्वागत किया, वहीं सर्राफा कारोबारियों ने टैक्स ड्यूटी में कटौती न होने पर गहरी निराशा जताई। विशेषज्ञों ने इसे ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की दिशा में बड़ा कदम बताया, हालांकि आम व्यापारी अब भी जीएसटी के सरलीकरण और सीधी टैक्स छूट की उम्मीद लगाए बैठा है। कुल मिलाकर, उद्योग जगत ने इसे भविष्यगामी और संतुलित बजट की संज्ञा दी है। टैक्स में छूट की उम्मीद थी, व्यापारी निराश
बैठक की अध्यक्षता कर रहे अनिल अग्रवाल ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह बजट निश्चित तौर पर संतुलित है, लेकिन व्यापारी वर्ग में थोड़ी निराशा भी है। उन्होंने बताया कि हर व्यापारी उम्मीद करता है कि उसे पिछले साल के मुकाबले इस बार अधिक टैक्स छूट मिलेगी, जो नहीं हुआ। हालांकि, एमएसएमई सेक्टर और चिकित्सा के क्षेत्र में 10 हजार करोड़ के बायो-फार्मा निवेश की उन्होंने सराहना की। उनका मानना है कि कैंसर की दवाएं सस्ती होने से आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी। इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में फंसे व्यापारियों को अब मिलेगा प्रोविजनल रिफंड
आयकर विभाग के दृष्टिकोण से बजट की बारीकियां समझाते हुए एडिशनल कमिश्नर श्याम प्रसाद ने इसे ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ का बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि पहले एक्सपोर्टर्स को ही तत्काल रिफंड मिलता था, लेकिन अब उन व्यापारियों का पैसा ब्लॉक नहीं होगा जिनका कच्चा माल महंगा है और तैयार माल पर टैक्स कम है। सरकार अब उन्हें भी प्रोविजनल रिफंड देगी, जिससे बाजार में वर्किंग कैपिटल की कमी दूर होगी। अब खेल और मेडिकल को बढ़ावा देने वाला साल
सीए हिमांशु गुप्ता ने बजट को बहुत ही सामान्य और विकासोन्मुख करार दिया। उन्होंने व्यापारियों की उस शंका को दूर किया जो बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट (छूट की सीमा) न बढ़ने से पैदा हुई थी। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल ही 12 लाख रुपये तक की बड़ी राहत दी गई थी, इसलिए इस बार उसे यथावत रखना जायज है। उन्होंने खेल और मेडिकल सेक्टर के लिए किए गए नए प्रावधानों को सरकार का दूरदर्शी कदम बताया। ITR की डेडलाइन बढ़ने और कंप्लायंस आसान होने से व्यापारियों का तनाव होगा कम
इनकम टैक्स प्रोसीजर पर बात करते हुए सीए ऋषभ अरोड़ा ने बताया कि सरकार ने कागजी कार्रवाई (Compliances) को कम करने की कोशिश की है। उन्होंने सबसे बड़ी राहत ‘डेडलाइन’ में बदलाव को बताया। अब नॉन-ऑडिट केस वाले व्यापारी 31 जुलाई की जगह 31 अगस्त तक रिटर्न भर सकेंगे। इसके अलावा रिवाइज्ड रिटर्न की तारीख भी 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है, जिससे टीडीएस और टीसीएस के नियमों में उलझे व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी। MSME का बजट दोगुना होना और रक्षा बजट में 15% की वृद्धि ऐतिहासिक
महानगर अध्यक्ष कुमार गौरव ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एमएसएमई सेक्टर के लिए बजट को 5 हजार करोड़ से सीधे 10 हजार करोड़ करना छोटे उद्योगों के लिए टर्निंग पॉइंट है। रक्षा बजट में 15% की बढ़ोतरी देश की सुरक्षा और स्वदेशी निर्माण को ताकत देगी। उन्होंने टैक्स स्लैब में बदलाव न होने को ‘स्थिरता’ (Stability) का प्रतीक बताया। किसान खुशहाल होगा, तभी शहर का व्यापार और व्यापारी तरक्की करेगा
जिला महामंत्री बल्ले ठाकुर ने बजट को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि यह किसानों के लिए बहुत ही बढ़िया बजट है। उन्होंने तर्क दिया कि व्यापारी और किसान एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जब सरकार किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस करेगी, तो उसका सीधा असर बाजार की रौनक और व्यापार की बढ़ोतरी पर पड़ेगा। ODOP पर फोकस अच्छा, लेकिन GST नियमों को भी सरल बनाए सरकार
महानगर महामंत्री अनुज गुप्ता ने ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) और एमएसएमई के लिए किए गए विशेष फंड की व्यवस्था की तारीफ की। हालांकि, उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया कि जिस तरह आयकर (Income Tax) के नियमों को सरल किया गया है, उसी तर्ज पर जीएसटी (GST) में भी सुधार की जरूरत है। अगर जीएसटी की प्रक्रिया आसान होती है, तो व्यापारियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। सर्राफा बाजार में छाई मायूसी, टैक्स ड्यूटी कम न होने से बढ़ी परेशानी
सर्राफा सेक्टर का प्रतिनिधित्व करते हुए जी.आर. अग्रवाल ने निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सोने-चांदी के भावों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच व्यापारी पहले ही एमसीएक्स (MCX) के चक्रव्यूह में फंसा है। व्यापारियों को उम्मीद थी कि सरकार गोल्ड पर टैक्स ड्यूटी 3% से घटाकर 2% करेगी, लेकिन बजट में इस पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि फिलहाल व्यापारियों को धैर्य रखने की जरूरत है क्योंकि भाव दोबारा स्थिर होने में समय लगेगा।