गाजियाबाद में बिल्डिंग से कूदकर सुसाइड करने वाली तीनों बहनों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आ गई है। इसमें मौत की वजह ब्रेन हैमरेज बताई गई है। डॉक्टरों के मुताबिक, नौवीं मंजिल (85 फीट ऊंचाई) से कूदने के बाद लड़कियों के सिर में गंभीर चोट आई, जिसके चलते उन्हें ब्रेन हैमरेज हो गया। गाजियाबाद में तीनों लड़कियों का बुधवार रात साढ़े आठ बजे तक पोस्टमॉर्टम चला। तीन डॉक्टरों की टीम ने ढाई घंटे तक पोस्टमॉर्टम किया। इसके बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिए। परिवार बच्चियों के शवों को दिल्ली ले गया, जहां रात 12 बजे निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। इसके बाद परिवार ने खुद को अपने फ्लैट में बंद कर लिया। दैनिक भास्कर जब मौके पर पहुंचा तो किसी ने दरवाजा नहीं खोला। बाद में कुछ महिलाएं पहुंची तो दरवाजा खुला, लेकिन किसी ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। बच्चियों ने पिता ने बस इतना कहा कि बाद में सभी सवालों के जवाब दूंगा। इधर, बच्चियों के सुसाइड नोट की कुछ बातें सामने आई हैं। पुलिस ने दावा किया है कि नोट में लिखा है, “तुम्हारी मार से बेहतर हमें मौत लगती है। इसलिए हमने खुदकुशी कर ली… सॉरी पापा।” DCP निमिष पाटिल ने बताया- अभी तक मामले में परिवार ने कोई शिकायत नहीं दी है। डायल 112 पर मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने शवों का पोस्टमॉर्टम कराया। जांच में सुसाइड की बात सामने आई। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किस बच्ची ने पहले छलांग लगाई। तस्वीरें देखिए- आज के अपडेट्स पढ़िए- अब पूरा मामला समझ लीजिए- 3 फरवरी की रात तीन नाबालिग बहनें निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) ने नौवीं मंजिल की बालकनी से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस के मुताबिक, मंगलवार रात 2 बजे तीनों ने कमरे को अंदर से बंद किया, फिर स्टूल रखकर एक-एक करके बालकनी से छलांग लगाई। पिता ने कहा कि बेटियों ने कोरियन गेम खेलने के दौरान टास्क पूरा करते हुए मौत को गले लगाया। हालांकि, पुलिस की 10 घंटे की छानबीन के बाद पता चला कि पिता ने बच्चों को डांटा था और मोबाइल छीन लिया था। इसके चलते तीनों ने यह कदम उठाया। घटना भारत सिटी बी-1 टॉवर के फ्लैट नंबर 907 की है। पुलिस जांच में पता चला कि चेतन की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। फ्लैट का 12 हजार रुपए किराया था। परिवार के लोगों ने पुलिस को बताया कि कोविड के दौरान तीनों लड़कियां कई-कई घंटे कोरियन म्यूजिक सुनती थीं। उन पर कोरियन कल्चर का इतना हावी था कि वे खुद को भारतीय की जगह कोरियन मानने लगी थीं। कोरियन भाषा में बात भी करती थीं। पढ़ाई-लिखाई में रुचि कम होने से तीनों बहनें फेल होने लगीं, तो स्कूल जाना बंद कर दिया। आर्थिक तंगी के चलते पिता चेतन ने भी पढ़ाई पर ज्यादा जोर नहीं दिया, क्योंकि उन्हें लग रहा था कि एक खर्च कम हो रहा है। वे योजना बना रहे थे कि जब आर्थिक स्थिति सुधरेगी, तब दोबारा एडमिशन करवा देंगे। सुसाइड की कहानी में पुलिस 5 सवालों के जवाब ढूंढ रही- सवाल 1. बालकनी पर जहां से तीनों बहनों ने कूदकर सुसाइड किया, वहां बॉलकनी में रेलिंग पर और बाहर की तरफ खड़े होने की जगह नहीं थी। जबकि सामने फ्लैट में रहने वाले ने कहा कि बच्ची रेलिंग पर बैठी हुई थी। सवाल 2. जहां से तीनों ने छलांग लगाई, वहां नौवीं मंजिल की ऊंचाई करीब 85 फीट है। तीनों बच्चियों के शव जहां गिरे, वहां दीवार से एक शव करीब 1 फीट दूर, दूसरी बहन का शव 8 फीट दूर और तीसरी बच्ची का शव 9 फीट दूर मिला। इतनी ऊंचाई से आखिर दीवार से सटकर शव का गिरना संदेह पैदा कर रहा है। सवाल 3. अगर तीनों बच्चियां बैठकर कूदी तो फिर तीनों के शव एक ही दिशा में गिरने थे। सवाल 4. पड़ोसियों के मुताबिक, चेतन की दोनों पत्नियां बहनें हैं। घटना से पहले परिवार में झगड़ा हुआ था। पत्नियां अभद्र गालियां दे रही थीं? वे पति की तरफ इशारा कर रही थीं। सवाल 5. नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिसकर्मी ने बताया- पुलिश कमिश्नर के सामने दोनों पत्नी नहीं आईं, अंदर से दरवाजा बंद कर लिया, पति एक ऑफिसर के पैर पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाता दिखा, फिर जोर-जोर से रोता रहा। अब घटना से जुड़ी तस्वीरें-
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