लखनऊ में ब्रह्माकुमारीज़ ने सर्व धर्म सम्मेलन आयोजित किया:आध्यात्मिक एकता पर जोर, विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने दिए विचार

ब्रह्माकुमारीज़ संस्था ने लखनऊ के विपुल खंड में एक सर्व धर्म सम्मेलन का आयोजन किया। इसका मुख्य विषय ‘स्पिरिचुअल यूनिटी इन डायवर्सिटी: एन इंटरफेथ रिस्पांसिबिलिटी’ था। सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर आपसी सद्भाव, सहिष्णुता और मानव धर्म की भावना को मजबूत करना था। कार्यक्रम की शुरुआत तीन मिनट के मौन ध्यान से हुई, जिससे सभागार में शांति का माहौल स्थापित हुआ और विश्व शांति की कामना की गई। इसके बाद ‘वन गॉड, वन वर्ल्ड’ विषय पर एक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई। इस तरह धर्मों का सामंजस्य समाज में शांति लाता है राजयोगिनी राधा दीदी ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि जिस प्रकार विभिन्न सुर मिलकर मधुर संगीत बनाते हैं, उसी तरह धर्मों का सामंजस्य समाज में शांति लाता है। सम्मेलन में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और बहाई धर्मों के प्रतिनिधियों ने मिलकर दीप प्रज्वलित किया, जो आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बना। इस अवसर पर कई धर्मगुरुओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए। सरदार हरपाल सिंह जग्गी ने अपने संबोधन में कहा कि बढ़ते धार्मिक उन्माद के इस दौर में मानव धर्म को याद रखना अत्यंत आवश्यक है। मौलाना यासूब अब्बास ने बताया कि इस्लाम का मूल संदेश इंसानियत और करुणा है और जरूरतमंदों की मदद करना ही सच्चा धर्म है। ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक शैलेंद्र जैन ने जैन दर्शन के सिद्धांतों को समझाते हुए कहा कि मन,वचन और कर्म से किसी को कष्ट पहुँचाना भी हिंसा है।उन्होंने भगवान महावीर के ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत को आज भी प्रासंगिक बताया। फादर लॉरेंस डेविन ने आध्यात्मिक एकता को एक सामूहिक जिम्मेदारी बताया और कहा कि निर्मल हृदय ही सच्ची समृद्धि है। भिक्षु देवेंद्र ने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि दुख का मूल कारण हमारे अपने विचार हैं और अंतर्मन की शुद्धि से ही वास्तविक सुख प्राप्त होता है।इस्कॉन के आनंदी वल्लभ ने ब्रह्माकुमारीज़ संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा से भरे इस दौर में शांति का संदेश अत्यंत आवश्यक है।प्रेम सिंह बहाई ने सामूहिक प्रार्थना का आयोजन किया और सभी धर्मों की एकता का संदेश दिया।