गोंडा में न्यायिक कार्यों में लापरवाही पर कार्रवाई:रीडर राजेश कुमार पांडेय निलंबित, 43 साल पुराने वाद लंबित रखने का मामला

गोंडा में न्यायिक कार्यों में गंभीर अनियमितता और लापरवाही के आरोपों पर जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने कड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने सोमवार देर शाम उपजिलाधिकारी (न्यायिक) तरबगंज न्यायालय में तैनात रीडर राजेश कुमार पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। जिलाधिकारी के अनुसार, निलंबित कर्मचारी पर 43 वर्ष पुराने वादों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने का गंभीर आरोप है, जिससे शासन स्तर पर जिले की छवि प्रभावित हुई है। जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 1982 में निस्तारित वादों के विरुद्ध दाखिल बाजदायर और विलंब माफी प्रार्थना-पत्रों को पीठासीन अधिकारी के विधिवत आदेश के बिना ही पोर्टल पर मूल वाद के रूप में दर्ज कर लिया गया और ऑनलाइन तिथियां भी अंकित कर दी गईं। इसके कारण ये प्रकरण पोर्टल पर सबसे पुराने मामलों की सूची में प्रदर्शित होने लगे। संबंधित पत्रावलियों में न तो कोई ऑर्डर शीट उपलब्ध पाई गई और न ही इन मामलों को कभी पीठासीन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया। सक्षम आदेश के बिना वादों को पोर्टल पर फीड कर तिथियां निर्धारित की जाती रहीं। न्यायालयी पत्रावलियों के रख-रखाव, पोर्टल अपडेट और न्यायिक कार्यों में बरती गई इस गंभीर लापरवाही के कारण वादों के निस्तारण में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी। रीडर द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्य किए जाने से उनकी सत्यनिष्ठा भी संदिग्ध प्रतीत हुई है। निलंबन अवधि के दौरान राजेश कुमार पाण्डेय को वित्तीय हस्त पुस्तिका के प्रावधानों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा, बशर्ते वह किसी अन्य सेवायोजन या व्यवसाय में संलग्न न होने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें। प्रकरण की विभागीय जांच के लिए अपर उपजिलाधिकारी द्वितीय को जांच अधिकारी नामित किया गया है।