मेरठ के आदित्य ने अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीता सिल्वर:पांच साल की उम्र में शुरू किया था किकबॉक्सिंग का सफर , अगला टारगेट है एशियन चैंपियन बनना

ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करना आसान नहीं होता, लेकिन आदित्य मकोरवाल ने इसे संभव कर दिखाया है। 5वें इंडियन ओपन इंटरनेशनल किक बॉक्सिंग कप में सिल्वर मेडल जीतकर आदित्य ने एक बार फिर साबित किया कि कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन से कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में 4 से 8 फरवरी तक आयोजित 5वें इंडियन ओपन इंटरनेशनल किक बॉक्सिंग कप में 20 से अधिक देशों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। आदित्य ने पहली बार -69 किलोग्राम कैटेगरी में खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया और फाइनल में उज्बेकिस्तान के खिलाड़ी से कड़े मुकाबले में तीन अंकों से हारकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। 5 साल की उम्र में शुरू किया मार्शल आर्ट आदित्य ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2008 में मात्र 5–6 साल की उम्र में मार्शल आर्ट शुरू किया था। उनके पिता स्वयं एक अच्छे बॉक्सर रहे हैं और उन्हीं का सपना था कि बेटा खेल के क्षेत्र में आगे बढ़े। गांव में सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने ताइक्वांडो से शुरुआत की। सही प्लेटफॉर्म न मिलने के कारण आदित्य ने कुछ समय के लिए मार्शल आर्ट छोड़ दी और क्रिकेट खेलने लगे। लेकिन 2016 में मेरठ के एक स्कूल में एडमिशन के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया जब उनके स्कूल के शिक्षक ने उनके पुरानी उपलब्धियां को देखा और उन्हें फिर किकबॉक्सिंग में जाने के लिए प्रेरित किया साथ ही उन्होंने बताया की उनके स्पोर्ट्स कोच अरविंद सेडवालिया ने भी उनकी प्रतिभा पहचानी और उन्हें किक बॉक्सिंग की राह दिखाई। नेशनल से इंटरनेशनल तक का सफर 2017 में पहला नेशनल खेलने के बाद आदित्य ने लगातार मेहनत जारी रखी उसके बाद उन्होंने 2018 में फेडरेशन कप में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया और उसके बाद अपनी मेहनत और अनुशासन से आदित्य ने 2019 में नेशनल में गोल्ड जीता और फिर उसके बाद लगातार 2023 स 2025 में उन्होंने नेशनल चैंपियनशिप में प्रतिभाग किया और बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोल्ड जीता और हाल ही में आयोजित 5वें इंडियन ओपन इंटरनेशनल कप में सिल्वर हासिल किया | परिवार बना सबसे बड़ा सहारा आदित्य बताते हैं कि हार के समय भी उनके माता-पिता ने कभी हिम्मत नहीं टूटने दी। मां का सुबह 5 बजे उठकर डाइट बनाना और पिता का रोज़ रनिंग के लिए जगाना आज भी उन्हें याद है। वह अपने माता-पिता को ही अपना पहला और सबसे बड़ा कोच मानते हैं। अगला लक्ष्य: एशियन चैंपियन बनना आदित्य का अगला लक्ष्य आगामी एशियन किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करना है। उनका कहना है कि अब पीछे मुड़कर देखने का वक्त नहीं, आगे सिर्फ जीत ही लक्ष्य है।