महाशिवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष बेहद खास संयोग लेकर आ रहा है। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उत्सव के साथ-साथ विषपान कर सृष्टि की रक्षा करने वाले नीलकंठ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है। इस बार शिवरात्रि 15 फरवरी (रविवार) को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5:34 बजे से शुरू होकर 16 फरवरी को सुबह 9:00 बजे तक रहेगी। चार प्रहर की पूजा का समय और महत्व ज्योतिषाचार्य आरती दुबे ने बताया कि शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है। यदि आप चारों प्रहर की पूजा नहीं कर सकते, तो शाम के समय जलाभिषेक करना भी फलदायी होगा। राशियों के अनुसार विशेष उपाय और सावधानी ज्योतिषाचार्य आरती दुबे ने बताया कि,इस शिवरात्रि पर मेष, मिथुन, कर्क और वृश्चिक राशि वालों पर महादेव की विशेष कृपा रहेगी। वहीं कुंभ, सिंह और मकर राशि वालों को पूजा में विशेष सावधानी और ध्यान देने की आवश्यकता है। मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष अभिषेक विधि
आरती दुबे ने बताया कि,जातक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष द्रव्यों का प्रयोग कर सकते हैं। नौकरी के लिए: गन्ने के रस से अभिषेक करें और शमी पत्र व धतूरा चढ़ाएं। प्रतियोगी परीक्षा में सफलता: बेलपत्र पर लाल चंदन लगाकर अर्पित करें। मंगल दोष निवारण: अनार के रस से शिवजी का अभिषेक करें। गंभीर बीमारी से मुक्ति: हरे आंवले के रस को जल में मिलाकर स्टील के लोटे से रात 9:00 से 9:15 के बीच अभिषेक करें। मोक्ष प्राप्ति: महादेव पर तुलसी अर्पित करना इस दिन विशेष लाभकारी माना गया है। इन बातों का रखें खास ख्याल:
शिवलिंग पर पूजा करते समय ध्यान रखें कि कभी भी गुड़हल का फूल और पीला सिंदूर न चढ़ाएं। अभिषेक की शुरुआत हमेशा गंगाजल से करें। हालांकि, यदि आप किसी फल के रस (जूस) से अभिषेक कर रहे हैं, तो गंगाजल की अनिवार्यता नहीं होती। दोपहर की पूजा के लिए 12:35 से 1:44 तक का समय श्रेष्ठ रहेगा।