छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के कैंपस में पिछले दो दिनों से बिखरी ‘फागुन की फुलवारी’ शनिवार को उत्साह और उमंग के साथ सिमट गई। स्कूल ऑफ एडवांस्ड एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित ‘एग्रीफेस्ट 2026’ के समापन समारोह में कृषि की आधुनिक तकनीक और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। सीनेट हॉल में जब छात्र मॉडल के जरिए खेती का भविष्य दिखा रहे थे, तो दूसरी ओर पारंपरिक जायकों की खुशबू ने हर किसी को रुकने पर मजबूर कर दिया। शोध और उद्यमिता से बदलेगी खेती की तस्वीर मुख्य अतिथि प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि एग्रीफेस्ट जैसे मंच केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की धुरी हैं। उन्होंने जोर दिया कि आज की कृषि शिक्षा को सीधे अनुसंधान और ग्रामीण विकास से जोड़ने की जरूरत है। विशिष्ट अतिथि डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी (CSA विश्वविद्यालय) ने छात्रों के स्टार्टअप आइडियाज की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य कृषि आधारित उद्योगों का ही है। जायके का तड़का: सत्तू के पराठे और मोहब्बत का शरबत इस महोत्सव में केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि ‘खेत से थाली तक’ का सफर भी दिखा। कृषि के छात्रों द्वारा तैयार किए गए सत्तू के पराठे, पारंपरिक चावल के फरे और ‘मोहब्बत का शरबत’ विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। छात्रों ने यह साबित किया कि वे केवल फसल उगाना ही नहीं, बल्कि खाद्य सामग्री का मूल्य संवर्धन (Value Addition) करना भी जानते हैं। तस्वीरें देखिए… प्रतिभा का प्रदर्शन: इन्होंने मारी बाजी टीम भावना से मिली सफलता:
अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. अंशु यादव ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से छात्रों में नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। कार्यक्रम के अंत में स्कूल के निदेशक डॉ. हिमांशु त्रिवेदी ने सभी का आभार जताते हुए कहा कि,यह महोत्सव कृषि नवाचार और सांस्कृतिक गरिमा के समन्वय की एक नई मिसाल बना है। ‘फागुन की फुलवारी’ ने न केवल कैंपस को महकाया, बल्कि भविष्य के कृषि वैज्ञानिकों को एक नई दिशा भी दी।