होली गीत कार्यशाला का महाशिवरात्रि पर समापन:28 महिलाओं ने सीखे पारंपरिक लोकगीत

गौरैया संस्कृति संस्थान द्वारा आयोजित होली गीत कार्यशाला का समापन महाशिवरात्रि के अवसर पर किया गया। यह कार्यशाला अलीगंज स्थित जैक एंड जिल स्कूल में रीना सिंह के संयोजन में संपन्न हुई। संस्थान की संस्थापक और वरिष्ठ लोकगायिका रंजना मिश्रा के निर्देशन में प्रतिभागियों को पारंपरिक लोकसंगीत की विभिन्न विधाएं सिखाई गईं। कार्यशाला में धमार, उलारा, चैती, चौताल, होली, रसिया और जबाबी होली जैसे पारंपरिक गीतों का प्रशिक्षण दिया गया। 13 होली गीत सीखे प्रतिभागियों ने ‘बाबा काशी विश्वनाथ गौरा संघे खेलेलें होरी…’, ‘होली खेलै सिया रघुवीरा…’, ‘रसिया रोज मेरे घर आवे..’ और ‘मोरा फागुन में जियरा बहके लला…’ सहित कुल 13 होली गीत सीखे। इसके बाद ‘सिर बांधे मुकुट खेलै होरी…’ गीत का भी अभ्यास कराया गया।रंजना मिश्रा ने बताया कि ये सभी गीत होली पर्व पर पारंपरिक रूप से गाए जाते हैं और हमारी लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। 28 महिलाएं शामिल हुईं कार्यशाला में अल्पना श्रीवास्तव, रमा सिंह, अमिता द्विवेदी, सुनीता निगम, नीलम तिवारी, लता तिवारी, रीना सिंह, माधुरी सिंह, शशि सिंह, दीपा शर्मा, नीलम सचान, अनुपमा श्रीवास्तव, स्मिता अस्थाना, प्रतिमा त्रिपाठी और शशि वर्मा रासी सहित कुल 28 महिलाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से जुड़ीं।समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने एक-एक गीत प्रस्तुत कर अपना आत्मविश्वास प्रदर्शित किया। संस्थान ने जानकारी दी कि कार्यशाला की प्रस्तुति का आयोजन जल्द किया जाएगा, जिसकी सूचना अलग से दी जाएगी।