गोरखपुर में जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम को लेकर समन्वित और ठोस कार्य योजना तैयार करने की दिशा में पहल तेज हो गई है। मंगलवार को RMRC में जिला जूनोटिक समिति की पूर्व परामर्श बैठक आयोजित हुई, जिसमें रैबीज सहित विभिन्न बीमारियों की रोकथाम, निगरानी व्यवस्था और विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में RMRC के निदेशक डॉ. हरिशंकर जोशी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा, बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स के अधिकारियों समेत विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और प्रभावी नियंत्रण के उपायों पर अपने सुझाव दिए।
जिला कार्य योजना बनाने पर जोर
बैठक के दौरान जूनोटिक बीमारियों की रोकथाम के लिए जिला स्तर पर विस्तृत कार्य योजना तैयार करने पर सहमति बनी। सहयोगी संस्था जपाइगो के सहयोग से आयोजित बैठक में बीमारियों की रोकथाम, निगरानी तंत्र को मजबूत करने और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया की रणनीति पर चर्चा हुई। रैबीज और एवियन इंफ्लुएंजा को लेकर समन्वित मॉडल पर काम करने की जरूरत पर सभी हितधारकों ने सहमति जताई। समन्वित मॉडल से मिलेगा बेहतर नियंत्रण
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने बताया कि प्रदेश में पीलीभीत के साथ गोरखपुर में भी इस तरह के समन्वित मॉडल पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन बैठकों का उद्देश्य ऐसी प्रभावी कार्य योजना तैयार करना है जिससे जानवरों से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम को मजबूत किया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि इसी मॉडल के जरिए पूर्वी उत्तर प्रदेश में जापानी इंसेफेलाइटिस पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है और अन्य बीमारियों पर भी इसी तरह काम आगे बढ़ाया जाएगा। गैर संचारी रोगों पर भी क्षमता बढ़ाने की पहल
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि गैर संचारी रोगों की रोकथाम के लिए भी जिले में क्षमता संवर्धन कार्यक्रम लगातार चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को शहर के एक होटल में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियों की रोकथाम और बेहतर उपचार व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।