CSJMU में प्रेमचंद की कहानी ‘नशा’ का मंचन:अमीरी मिलते ही बदला गरीब का व्यवहार; नाटक ने दिखाया सिद्धांतों पर पद-प्रतिष्ठा का असर

छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के मंच पर मंगलवार को मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘नशा’ जीवंत हो उठी। मौका था विश्वविद्यालय के लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स में चल रहे चार-दिवसीय ‘संभागीय नाट्य समारोह’ के दूसरे दिन का। इण्डियन आर्ट एण्ड कल्चरल सोसाइटी, कौशाम्बी के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दिखाया कि कैसे परिस्थितियां बदलते ही इंसान के आदर्श और सिद्धांत हवा हो जाते हैं। नाटक ने समाज के दोहरे चरित्र और अमीरी के ‘नशे’ पर तीखा प्रहार किया।
दो दोस्तों की कहानी, वर्ग संघर्ष और बदलता व्यवहार तेजेन्द्र सिंह ‘तेजू’ के निर्देशन में पेश किया गया यह नाटक दो दोस्तों ईश्वरी और वीर के इर्द-गिर्द घूमता है। ईश्वरी एक रईस जमींदार का बेटा है, जबकि उसका मित्र वीर एक साधारण क्लर्क का पुत्र है। नाटक की शुरुआत में वीर को एक ऐसे क्रांतिकारी युवक के रूप में दिखाया गया है। जो जमींदारों की विलासिता और उनके मजदूरों के प्रति व्यवहार की कड़ी आलोचना करता है। वह समानता और गांधीवादी मूल्यों की बातें करता है, लेकिन यह आदर्शवाद तब तक ही कायम रहता है जब तक वह अभाव में रहता है।
जब चढ़ा झूठी शान का ‘नशा’ कहानी में मोड़ तब आता है जब छुट्टियों के दौरान वीर अपने दोस्त ईश्वरी के साथ उसके गांव जाता है। वहां ईश्वरी उसे एक ‘गांधीवादी कुंवर साहब’ के रूप में पेश करता है। राजसी ठाठ-बाट, नौकरों की चाकरी और मिलने वाले विशेष सम्मान के बीच वीर धीरे-धीरे अपने सिद्धांतों को भूलने लगता है। वह खुद उन बुराइयों और अहंकार का हिस्सा बन जाता है, जिनकी वह कल तक निंदा करता था। नाटक बहुत ही मार्मिक ढंग से यह संदेश देने में सफल रहा कि सत्ता और संपत्ति का नशा शराब के नशे से भी ज्यादा गहरा होता है, जो इंसान की पहचान बदल देता है।
उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ और सीएसजेएम विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह के मुख्य अतिथि महाविद्यालय विकास परिषद के निदेशक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी रहे। उन्होंने कलाकारों के अभिनय की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे नाटक समाज को आईना दिखाने का काम करते हैं।

इस अवसर पर स्वामी हरिदास नाट्य अकादमी के निदेशक डॉ. राज कुमार त्रिपाठी, संगीत नाट्य अकादमी के कार्यक्रम समन्वयक प्रशांत यादव और प्रो. मीतकमल सहित बड़ी संख्या में छात्र एवं कला प्रेमी उपस्थित रहे। दर्शकों ने कलाकारों के जीवंत अभिनय और कहानी के सटीक रूपांतरण की तालियों के साथ सराहना की।