बरेली के सीबीगंज स्थित सुपीरियर इंडस्ट्रीज (शराब फैक्ट्री) में मंगलवार शाम से शुरू हुई आयकर विभाग की छापेमारी शनिवार देर शाम खत्म हो गई। दिल्ली और लखनऊ से आई टीमों ने करीब 90 घंटे से अधिक समय तक फैक्ट्री के चप्पे-चप्पे को खंगाला। जांच पूरी होने के बाद टीम फैक्ट्री के महत्वपूर्ण दस्तावेज, लैपटॉप और कंप्यूटर का डेटा अपने कब्जे में लेकर दिल्ली मुख्यालय के लिए रवाना हो गई है। फिलहाल प्लांट में उत्पादन पूरी तरह से बंद है और सन्नाटा पसरा हुआ है। ट्रांसपोर्टर और भूसी सप्लायर भी रडार पर
जांच के पांचवें दिन शुक्रवार को आयकर विभाग ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए फैक्ट्री से जुड़े ट्रांसपोर्टर और भूसी सप्लायरों को पुलिस के माध्यम से तलब किया। उनसे लंबी पूछताछ की गई और व्यापारिक लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों को जब्त कर लिया गया। अधिकारियों का मुख्य फोकस इस बात पर है कि कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार माल की ढुलाई में कहीं कागजी हेरफेर के जरिए टैक्स की चोरी तो नहीं की जा रही थी। 2003 तक के रिकॉर्ड्स और डिजिटल सबूतों की स्कैनिंग
सूत्रों के मुताबिक, आयकर विभाग ने बेहद गहराई से पड़ताल करते हुए वर्ष 2003 तक के पुराने दस्तावेजों को भी खंगाला है। अकाउंट विभाग के सर्वर और मैनेजमेंट से जुड़े रसूखदार लोगों के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। जब्त किए गए डिजिटल डेटा से अघोषित आय और बेनामी संपत्तियों के सुराग मिलने की प्रबल संभावना है। विभाग को आशंका है कि इस पूरे खेल में करोड़ों रुपये के लेनदेन की हेराफेरी की गई है। प्रदीप अग्रवाल के व्यापारिक साम्राज्य में हड़कंप
सुपीरियर ग्रुप उत्तर प्रदेश के अल्कोहल और बेवरेज सेक्टर का दिग्गज नाम है। पूर्व राज्यसभा सांसद स्वर्गीय मुरली मनोहर अग्रवाल के पुत्र प्रदीप अग्रवाल इस ग्रुप का संचालन करते हैं। कोका-कोला बॉटलिंग और एथेनॉल जैसे बड़े कारोबार से जुड़े होने के कारण, इस कार्रवाई ने पूरे उत्तर प्रदेश के व्यापारिक जगत में हलचल पैदा कर दी है। अब सबकी नजरें दिल्ली मुख्यालय की अगली कार्रवाई और आधिकारिक रिपोर्ट पर टिकी हैं।