गोरखपुर में बिजली कर्मियों ने दिया अल्टीमेटम:स्मार्ट मीटर और उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को रोकने की मांग, आंदोलन की दी चेतावनी

गोरखपुर में बिजली कर्मियों पर की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों और जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। समिति ने कहा है कि मांगें न मानी गईं तो मार्च और अप्रैल में चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों की 26 फरवरी को लखनऊ में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में तय किया गया कि यदि शीघ्र ही सभी दमनात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली गईं और जबरन स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया बंद नहीं की गई, तो पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। अप्रैल में होगा शक्ति भवन का घेराव
समिति ने घोषणा की है कि मार्च माह में सभी क्षेत्रीय एवं परियोजना मुख्यालयों पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके बाद अप्रैल में राजधानी लखनऊ स्थित शक्ति भवन पर विशाल प्रदर्शन आयोजित कर आगे की रणनीति की घोषणा की जाएगी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों द्वारा स्मार्ट मीटर न लगवाने वाले कर्मियों की बिजली काटने के निर्देश दिए गए हैं या अवैध रूप से विद्युत आपूर्ति बाधित की गई है, उनके विरुद्ध आवश्यक होने पर प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जाएगी। समिति के अनुसार 20 फरवरी को लखनऊ के प्राग नारायण मार्ग स्थित हाइडिल कॉलोनी की बिजली जबरन स्मार्ट मीटर लगाने के उद्देश्य से काट दी गई थी, जिससे परिवारों को परेशानी उठानी पड़ी। मार्च 2023 के आश्वासन का हवाला
संघर्ष समिति ने कहा कि मार्च 2023 के आंदोलन के बाद ऊर्जा मंत्री ने पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन को उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां वापस लेने के निर्देश दिए थे। समिति का आरोप है कि लगभग तीन साल बीतने के बावजूद वे आदेश प्रभावी रूप से लागू नहीं किए गए हैं।
समिति के अनुसार निजीकरण के विरोध में पिछले 15 महीनों से आंदोलन जारी है। इस दौरान संविदा कर्मियों को सेवा से हटाने, बड़े पैमाने पर तबादले करने और फेसियल उपस्थिति के नाम पर वेतन रोकने जैसी कार्रवाइयां की गई हैं। आंदोलन के 456 दिन पूरे होने पर प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं में बिजली कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन कर दमनात्मक नीतियां समाप्त करने की मांग उठाई।