देश के विभिन्न राज्यों के लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले बंटी–बबली समेत 4 आरोपियों को साइबर क्राइम टीम ने अरेस्ट किया है। ठगों ने इनकम टैक्स, ईडी और कस्टम अफसर बनकर यूपी, गुजरात, राजस्थान, बिहार समेत साउथ इंडिया के तकरीबन 40 लोगों से 1.25 करोड़ की ठगी की। हालांकि यह आंकड़ा कई गुना बड़ा होने का पुलिस अनुमान लगा रही है। पकड़े गए ठग 2 साल से बंद पड़े मोबाइल नंबर से वाट्सएप कॉल कर वारदात को अंजाम दे रहे थे। आरोपी दो साल से बंद पड़े मोबाइल नंबरों के जरिए व्हाट्सएप कॉल कर लोगों को झांसे में लेते थे। वे खुद को केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर कार्रवाई का डर दिखाते और फिर ‘सेटलमेंट’ के नाम पर रकम वसूलते थे। साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच के दौरान व्हाट्सएप के कैलिफोर्निया स्थित मुख्यालय से डाटा प्राप्त किया। डाटा में मिले आईपी एड्रेस के आधार पर लोकेशन लखीमपुर खीरी की पाई गई, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह का खुलासा किया। 30 से अधिक म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल पुलिस को आरोपियों के पास से 30 से अधिक ‘म्यूल अकाउंट’ (फर्जी या किराए के बैंक खाते) मिले हैं। इन खातों के माध्यम से ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती थी। खाता धारकों को रकम के बदले 5 से 10 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता था। अफसर बनकर करते थे वारदात डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह ने बताया- काफी समय से एक मोबाइल नंबर से ठगी की शिकायतें मिल रही थीं। ठग वाट्सएप कॉल के जरिए रिश्तेदार व अफसर बनकर लोगों से ठगी करते थे। प्रतिविंब एप के जरिए नंबर की लोकेशन कानपुर के चकेरी और जाजमऊ इलाके की मिल रही थी, जिस पर साइबर क्राइम की टीम काम कर रही थी। पुलिस ने जांच की तो मोबाइल नंबर कंपनी के चकेरी सर्वर निकला। पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि उनसे वाट्सएप कॉल के जरिए ठगी की गई थी। जिस पर पुलिस ने वाट्सएप के कैलीफोर्निया स्थित हेडक्वार्टर से वाट्सएप का डाटा मांगा, जिस पर उन्होंने लखीमपुर खीरी के आईपी एड्रेस की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने छापेमारी कर गिरोह के सरगना बहराइच निवासी कमलेश गौतम, उसके भाई विकास गौतम, लखीमपुर निवासी राखी मिश्रा और दीपक शर्मा को गिरफ्तार किया है। पहचान छिपाने के लिए करते थे VPN का इस्तेमाल डीसीपी क्राइम ने बताया कि शातिर अपनी पहचान छिपाने के लिए VPN का प्रयोग करते थे। कमलेश के पास 30 से 35 म्यूल अकाउंट मिले है। कमलेश खातों में आई रकम का 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा खाताधारक को देता था। गिरोह में राखी का काम लोगों को हनीट्रैप में फंसाना था, वहीं विकास और दीपक का काम कैश को हैंडल करना था। दीपक और विकास ठगी की रकम को निकाल कर विभिन्न अकाउंट में ट्रांसफर करते थे, इसके लिए दीपक को बकायदा 35 से 40 हजार प्रतिमाह सैलरी दी जाती थी। कमलेश और राखी लखीमपुर में नेटवर्क मार्केटिंग का काम करते थे कमलेश और राखी की मुलाकात 2018 में हुई थी। कमलेश और राखी लखीमपुर में नेटवर्क मार्केटिंग का काम करते थे, जहां दोनों के प्रेम संबंध हो गए थे। डीसीपी ने बताया कि ठग जिस नंबर से लोगों को वाट्सएप कॉल करते थे। वह उनके पास 2 साल पहले था, लेकिन नंबर का इस्तेमाल न करने की वजह से नंबर बंद हो गया था, हालांकि उस नंबर से वाट्सएप बंद नहीं किया था, जिसके जरिए वह ठगी की वारदातों को अंजाम देते थे। डीसीपी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 10 टीमें लगी हुई थी, जिन्होने उन्नाव, लखीमपुर, गोंडा, बहराइच तक दबिश दी, जिसके बाद आरोपी पकड़ में आए। क्या है प्रतिविंब पोर्टल साइबर अपराधियों को ट्रैक करने और उन्हें पकड़ने में प्रतिविंब पोर्टल कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सहायता करता है। यह जीआईएस आधारित प्रणाली वास्तविक समय में धोखाधड़ी में शामिल मोबाइल नंबरों की मैपिंग कर अपराधियों की लोकेशन की जानकारी देता है। यह साइबर अपराधियों और उनके भौगोलिक स्थानों को मानचित्र पर दिखाता है, जिससे पुलिस उन्हें तुरंत ट्रैक कर सकती है। यह पोर्टल सिम कार्ड, मोबाइल डिवाइस और धोखाधड़ी वाले खातों से जुड़े डाटा का विश्लेषण कर पुलिस को सटीक जानकारी प्रदान करता है।