मवाना तहसील के ग्राम फिटकरी में वन विभाग की टीम ने एक साथ तीन अत्यंत विषैले रसल वाइपर (Russell’s Viper) सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू किया। ये सांप गोबर के एक बिटोडे (भंडारण स्थल) में छिपे हुए पाए गए थे। इस रेस्क्यू अभियान का नेतृत्व बीट प्रभारी अतुल दुबे ने किया। उनके साथ श्री सीताराम और श्री किशोरी वाचरों ने सहयोग दिया। टीम ने पूरी सावधानी बरतते हुए तीनों सांपों को पकड़ा और उन्हें हस्तिनापुर रेंज कार्यालय लाया गया। बाद में, सभी सांपों को कौरव वन ब्लॉक के जंगल क्षेत्र में उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
रसल वाइपर, जिसका वैज्ञानिक नाम Daboia russelii है, स्थानीय रूप से चेन वाइपर के नाम से भी जाना जाता है। यह एक अत्यंत विषैला और जानलेवा सांप है। इसकी पहचान इसके शरीर पर मौजूद गोल या अंडाकार चेन जैसे धब्बों से होती है, जिसका रंग भूरा या पीला-भूरा होता है। इसका सिर त्रिकोणीय आकार का होता है और कभी-कभी यह अजगर जैसा प्रतीत होता है। हालांकि, अजगर गैर-विषैला होता है, जबकि रसल वाइपर अत्यधिक विषैला होता है, और इनकी पहचान में भ्रम जानलेवा साबित हो सकता है। वन विभाग ने जनसामान्य के लिए कुछ सावधानियां भी बताई हैं। लोगों को गोबर, भूसे, लकड़ी या कचरे के ढेर में हाथ डालने से पहले सतर्क रहना चाहिए। सांप दिखने पर उसे छेड़ने या मारने का प्रयास न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचित करें। सांप काटने की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय तत्काल नजदीकी अस्पताल में उपचार कराएं। वन विभाग ने नागरिकों से वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करने और किसी भी प्रकार की जानकारी तुरंत विभाग को देने की अपील की है। समय पर दी गई सूचना से जनहानि को रोका जा सकता है।