राजधानी लखनऊ स्थित पुराविज्ञान संस्थान बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान अब विज्ञान को सीधे समाज तक पहुंचाने की पहल में जुट गया है। संस्थान ने साप्ताहिक रेडियो कार्यक्रम ‘कहानी धरती की – जहाँ धरती बोलेगी और हम सब सुनेंगे’ शुरू करने की घोषणा की है। इसका औपचारिक शुभारंभ राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर बीएसआईपी ऑडिटोरियम में किया गया । यह कार्यक्रम 3 मार्च 2026 से हर मंगलवार दोपहर 3 से 4 बजे तक रेडियो केजीएमयू गूंज 89.6 मेगाहर्ट्ज पर प्रसारित होगा। श्रोता इसे केजीएमयू गूंज मोबाइल ऐप के जरिए दुनिया में कहीं से भी सुन सकेंगे। शोध और समाज के बीच बनेगा सेतु बीएसआईपी के निदेशक प्रो. महेश जी ठक्कर ने कहा कि कार्यक्रम का मकसद वैज्ञानिक अनुसंधान को सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचाना है। सामूहिक विलुप्ति, डायनासोरों का युग, उल्कापिंड टक्कर, ज्वालामुखी विस्फोट, मानव विकास और अंतिम हिमयुग जैसे विषय अब कहानी के रूप में सुनाए जाएंगे। उन्होंने ‘150 वैज्ञानिक, 150 कहानियां’ की परिकल्पना भी साझा की। पोस्टर और प्रोमो का विमोचन रेडियो केजीएमयू गूंज के कार्यकारी प्रमुख प्रो. के.के सिंह ने कहा कि सामुदायिक रेडियो शिक्षा और जनजागरूकता का प्रभावी मंच है। जलवायु परिवर्तन, विकासवाद और वैश्विक तापन जैसे विषयों को समझाने में यह कार्यक्रम अहम भूमिका निभाएगा।कार्यक्रम के पोस्टर और प्रोमो ऑडियो का संयुक्त विमोचन किया गया। उद्घाटन कड़ी का संक्षिप्त प्रसारण भी सुनाया गया। इस मौके पर विज्ञान भारती के प्रांत अध्यक्ष डॉ. अरविंद माथुर ने विज्ञान में समावेशन और महिलाओं की भागीदारी पर जोर दिया। विद्यार्थियों और युवाओं पर फोकस कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. निमिष कपूर ने बताया कि बीएसआईपी के वैज्ञानिक सीधे श्रोताओं से संवाद करेंगे। वे जीवाश्म, भूविज्ञान, पुरावनस्पति विज्ञान और जलवायु परिवर्तन अनुसंधान को आसान भाषा में समझाएंगे। उद्देश्य है कि युवा पीढ़ी पृथ्वी के अतीत को समझकर भविष्य के प्रति सजग बने।अब हर मंगलवार रेडियो पर गूंजेगी धरती की कहानी विज्ञान की भाषा में, लेकिन आम लोगों के लिए।