भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (IIT कानपुर) के पूर्व छात्रों ने अपने संस्थान के विकास के लिए दिल खोलकर गुरुदक्षिणा दी है। दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच आयोजित चार अलग-अलग बैचों के रीयूनियन समारोहों में संस्थान को कुल 137.6 करोड़ रुपये के दान की घोषणा हुई है। यह राशि संस्थान और उसके छात्रों के विकास के विभिन्न क्षेत्रों में खर्च की जाएगी। इस अवधि में 1986 बैच (40वीं वर्षगांठ), 2000 बैच (सिल्वर जुबली), 1976 बैच (गोल्डन जुबली) और 1990 बैच (कोरल जुबली) के पूर्व छात्र देश-विदेश से कानपुर पहुंचे और अपनी संस्था को सार्थक योगदान देकर एक नई मिसाल कायम की। 1986 बैच ने 40वीं वर्षगांठ पर 11 करोड़ का संकल्प लिया 1986 बैच ने 21 दिसंबर 2025 को अपनी 40वीं वर्षगांठ के अवसर पर संस्थान के कैंपस में तीन प्रमुख विरासत परियोजनाओं के समर्थन हेतु 11 करोड़ रुपये की सामूहिक वित्तीय प्रतिबद्धता की घोषणा की। घोषित राशि का उपयोग SAC एक्सटेंशन ऑडिटोरियम, मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र तथा नए छात्रावास में एक टावर के निर्माण के लिए किया जाएगा। ये परियोजनाएं छात्र जीवन, मानसिक स्वास्थ्य और सामुदायिक सहभागिता को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। बैच ऑफ 2000 ने दिया 100 करोड़ का रिकॉर्ड योगदान 28 दिसंबर 2025 को बैच ऑफ 2000 ने अपने सिल्वर जुबली रीयूनियन के दौरान अपने अल्मा मेटर के लिए 100 करोड़ रुपये के योगदान की घोषणा की। यह भारत के किसी भी शैक्षणिक संस्थान में किसी एक बैच द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक योगदान है। इस ऐतिहासिक राशि से ‘मिलेनियम स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड सोसाइटी’ (MSTAS) की स्थापना का प्रस्ताव है, जो अंतःविषय शिक्षा और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार को बढ़ावा देगा। बैच के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र नवीन तिवारी ने कहा, IIT कानपुर ने हमें सिर्फ एक डिग्री नहीं दी। उसने हमें बड़े सपने देखने का साहस दिया। 1976 बैच ने गोल्डन जुबली में दिए 13.40 करोड़ IIT कानपुर के 1976 बैच ने नौ फरवरी को अपनी गोल्डन जुबली रीयूनियन के अवसर पर संस्थान में शिक्षा पूर्ण किए 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया। इस अवसर पर पूर्व छात्रों ने संस्थान की विभिन्न महत्वपूर्ण पहलों के समर्थन हेतु 13.40 करोड़ रुपये देने का संकल्प घोषित किया। बैच की ओर से मुक्तेश पंत ने बताया कि लगभग 25 वर्ष पहले बैच द्वारा किए गए योगदान को संस्थान ने विवेकपूर्ण निवेश के माध्यम से बढ़ाया और बाद में LVAD परियोजना (कृत्रिम हृदय अनुसंधान) के लिए उपयोग किया। इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए बैच ने 10 करोड़ का लक्ष्य रखा था, जिसे पार करते हुए योगदान 13.40 करोड़ तक पहुंचा। 1990 बैच ने दिए 13.2 करोड़ 17 फरवरी को 1990 बैच के पूर्व छात्रों ने रीयूनियन के अवसर पर संस्थान की शैक्षणिक, शोध तथा छात्र-केंद्रित पहलों के समर्थन के लिए 13.2 करोड़ रुपये के सामूहिक योगदान की घोषणा की।इस फंड को संस्थान उच्च स्तरीय शोध को बढ़ावा देगा और संस्थागत विकास को गति देगा। बैच कोआर्डिनेटर राजीव रंजन ने बताया कि सिल्वर जुबली के समय दिया गया 70 लाख रुपये का योगदान बढ़कर आज 1.5 करोड़ हो चुका है। बैच ने अपना कोरल जुबली लक्ष्य 13 करोड़ भी पार कर लिया है। डायरेक्टर बोले पूर्व छात्रों पर गर्व आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि मुझे अपने पूर्व छात्रों पर अत्यंत गर्व है। वह संस्थान को समय समय पर दान देते रहते हैं। वह ऐसी पहलों के समर्थन के लिए एकजुट हुए हैं जो सीधे तौर पर छात्रों के शैक्षणिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक कल्याण को प्रभावित करेंगी। यह फंड पूर्व छात्रों और संस्थान के बीच के अटूट संबंध का सशक्त प्रमाण है।