अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर रविवार को बड़ा चौराहा मेट्रो स्टेशन कविता, कहानी और जज्बातों के रंगों से सराबोर नजर आया। कानपुर मेट्रो और ‘इंकटेल्स’ संस्था के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में कलाकारों ने अपनी रचनाओं के जरिए नारी शक्ति को सलाम किया। ‘शो योर टैलेंट’ के तहत आयोजित इस ओपन माइक कार्यक्रम में महिलाओं के साथ बड़ी संख्या में पुरुषों ने भी हिस्सा लिया और काव्य पाठ व किस्सागोई के जरिए समाज में महिलाओं के अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया। कविताओं से गूंज उठा स्टेशन
दोपहर दो बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में युवा कवियों ने भावुक और प्रेरणादायक प्रस्तुतियां दीं। कवि अंकित ने जब पंक्तियां पढ़ीं, “ये मेरी मां की दुआओं का असर है, डूबता हूं तो दरिया उछाल देता है”, तो पूरा स्टेशन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहीं कवि नवीन की पंक्तियां “मां के सारे गहने बिक गए बच्चों को बड़ा बनाने में” सुनकर कई लोग भावुक हो गए। स्टेशन पर मौजूद यात्री भी अपनी यात्रा के दौरान रुककर इन प्रस्तुतियों का आनंद लेते नजर आए। नारी के विभिन्न रूपों पर काव्य प्रस्तुतियां
कार्यक्रम के दौरान कवयित्री अंकिता श्रीवास्तव ने “मैं अपनी जिंदगी की स्वयं चित्रकार हूं” कविता के जरिए महिलाओं के आत्मविश्वास को स्वर दिया। तृप्ति ठाकुर ने “वो स्त्री है, उसे समझाना बहुत आसान है” के माध्यम से अपनी बात रखी। विनय कुमार माधव की रचना “नारी तुम नारायणी हो” और “पापा ऐसा वर ढूंढो जिसको औरत समझ में आए” जैसी प्रस्तुतियों ने समाज को मजबूत संदेश दिया। इसके अलावा अंतरा शर्मा, चांदनी, ऐश्वर्या, राज, रजत शुक्ला और शादाब समेत कई कलाकारों ने भी अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। ‘शक्ति मेट्रो’ बनी आकर्षण का केंद्र
महिला दिवस के अवसर पर कानपुर मेट्रो ने ‘शक्ति मेट्रो’ की भी शुरुआत की है। इस विशेष मेट्रो ट्रेन के अंदर महिला उपलब्धियों को समर्पित प्रदर्शनी लगाई गई है, जो यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यह प्रदर्शनी एक सप्ताह तक चलेगी। इसके माध्यम से मेट्रो में सफर करने वाले यात्री देश और समाज की सफल महिलाओं की प्रेरणादायक कहानियों से रूबरू हो सकेंगे। इस दौरान मेट्रो स्टेशनों पर महिलाओं से जुड़े विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।