अलीगढ़ के सासनी गेट की स्काई टावर निवासी विनीत वार्ष्णेय ने वतन वापसी पर सोमवार को अबू धाबी की खौफनाक दास्तां बयां की। उन्होंने बताया कि वह 2007 से यूएई में हैं, लेकिन 28 तारीख की उस सुबह ने 17 साल का सुकून एक झटके में छीन लिया। आसमान में सफेद धुआं नहीं था, बल्कि एक के बाद एक गिरती मिसाइलें थीं। ऐसा लग रहा था जैसे मौत का कोई टाइम टेबल सेट कर दिया गया हो। विनीत वार्ष्णेय अबू धाबी की अल फतान मरीन सर्विसेज में कैप्टन के पद पर तैनात हैं। वह सोमवार सुबह की अलीगढ़ लौटे हैं। जब एक साथ फटीं 8-10 मिसाइलें कैप्टन विनीत बताते हैं कि उस दिन सुबह से ही फिजा बदली हुई थी। ईरान से छोड़ी गईं मिसाइलों के चलते डिफेंस एरिया के पास स्थित अल तबीला में अचानक सायरन गूंजने लगे। देखते ही देखते आसमान से मिसाइलों की बारिश होने लगी। पहली लहर में ही करीब 8 से 10 मिसाइलें एक साथ दागी गईं। गनीमत यह रही कि यूएई का डिफेंस सिस्टम एक्टिव था और कई मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट कर लिया गया, लेकिन धमाकों की आवाज इतनी भीषण थी कि पूरा बेस कांप उठा। विनीत कहते हैं कि अबू धाबी के मुसाफा इलाके में भी मिसाइल गिरी, जहां एक कैजुअल्टी की खबर ने हर किसी को पैनिक कर दिया। मोबाइल पर आता है सेफ्टी मैसेज जंग के बीच यूएई सरकार ने तकनीक को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया है। कैप्टन विनीत ने बताया कि वहां का सुरक्षा तंत्र इतना सटीक है कि खतरा भांपते ही हर व्यक्ति के मोबाइल पर एक टेक्स्ट मैसेज फ्लैश होता है। इस मैसेज में साफ हिदायत होती है कि जो लोग खुले में हैं, वे फौरन किसी सुरक्षित शेल्टर या कंक्रीट की छत के नीचे चले जाएं। जब डिफेंस सिस्टम मिसाइल को मार गिराता है या खतरा टल जाता है, तब दोबारा मैसेज आता है कि अब आप सुरक्षित हैं, अपने सामान्य काम पर लौट सकते हैं। यह सिलसिला अब वहां की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। 90% इंडस्ट्रियल गैस पर संकट कैप्टन विनीत ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त ही है। उन्होंने बताया कि कहते हैं कि भारत अपनी 90 फीसदी इंडस्ट्रियल गैस के लिए कतर पर निर्भर है। वर्तमान में कतर को पूरी तरह शटडाउन किया गया है, जिससे सप्लाई चेन टूट गई है। अगर यह स्थिति ज्यादा दिन रही तो भारत के उद्योगों में गैस की भारी किल्लत हो जाएगी। इसके अलावा, भारत का अधिकांश तेल ‘हॉर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) के रास्ते आता है। अगर यह समुद्री रास्ता बंद हुआ, तो भारत में ईंधन की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। बदल गया आसमान का रास्ता वतन वापसी का सफर भी अब पहले जैसा नहीं रहा। कैप्टन विनीत ने अपनी फ्लाइट की स्क्रीन पर जो देखा, वह हैरान करने वाला था। पहले यूएई से भारत आने वाली उड़ानें रसेल खैमा और पाकिस्तान के एयरस्पेस का इस्तेमाल करती थीं क्योंकि यह रास्ता छोटा था। लेकिन अब सुरक्षा कारणों से विमानों ने पाकिस्तान का रास्ता छोड़ दिया है। अब फ्लाइट्स पहले ओमान की तरफ जाती हैं और वहां से एक लंबा चक्कर काटकर भारतीय सीमा में दाखिल होती हैं। 4 घंटे के इस लंबे सफर में डर तो था, लेकिन अपनों के पास सुरक्षित पहुंचने का सुकून उससे कहीं ज्यादा बड़ा था।