डिजिटल साइंटिस्ट बनेंगे CSJMU के छात्र:100 शोधार्थियों ने सीखी ‘प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग’, एआई एजेंट से आसान होगी रिसर्च

छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिवर्सिटी (CSJMU) के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज एंड बायोटेक्नोलॉजी में बुधवार को आधुनिक जैविक अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एडवांसेज इन लाइफ साइंसेज (ICALS-2026) के तहत आयोजित इस प्रोग्राम में छात्रों और शोधार्थियों को बताया गया कि कैसे एआई की मदद से मेडिकल साइंस और रिसर्च की दुनिया बदल रही है। दवाओं की खोज में मददगार साबित होगी मशीन लर्निंग
तकनीकी सत्र में अलगप्पा यूनिवर्सिटी के बायोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग से आए प्रो. संजीव कुमार सिंह ने वायरस और इंसानी शरीर के आपसी संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि मशीन लर्निंग तकनीक के जरिए वायरस के व्यवहार को समझकर नई दवाओं की खोज को काफी तेज किया जा सकता है। इससे भविष्य में खतरनाक वायरसों से लड़ने के लिए सटीक दवाएं बनाने में कम समय लगेगा। सिखाया गया प्रोटीन की संरचना समझना
कार्यशाला के दौरान छात्रों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दी गई। अलगप्पा यूनिवर्सिटी के ही अरुण प्रवीण ने ‘अल्फाफोल्ड टूल’ के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एआई आधारित इस टूल की मदद से वायरल प्रोटीन की संरचना का पहले ही अनुमान लगाया जा सकता है। छात्रों ने खुद कंप्यूटर पर प्रोटीन स्ट्रक्चर का विश्लेषण करना सीखा, जो भविष्य में उनके शोध कार्य में काफी काम आएगा। रिसर्च में बढ़ेगा एआई एजेंट और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग का दखल
आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञ क्षितिज कुमार ने वैज्ञानिक कामों के लिए प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की बारीकियों को समझाया। उन्होंने बताया कि, शोध के क्षेत्र में एआई एजेंट का विकास कैसे किया जा सकता है और रिसर्च के काम को कैसे ऑटोमेटेड यानी स्वचालित बनाया जा सकता है। इससे वैज्ञानिकों और छात्रों का कीमती समय बचेगा और नतीजों में सटीकता आएगी। इस कार्यशाला में शहर के विभिन्न संस्थानों के लगभग 100 छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक का उपयोग तो जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही नैतिक जिम्मेदारी और वैज्ञानिक सोच का होना भी अनिवार्य है। अंत में छात्रों ने ऐसे और भी ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करने की मांग की। इस मौके पर प्रति-कुलपति प्रो. सुधीर के. अवस्थी ने कहा कि, तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। कार्यक्रम में डॉ. अनुराधा कलानी, डॉ. शिल्पा डी. कैस्था, प्रो. वर्षा गुप्ता समेत विभाग के सभी शिक्षक मौजूद रहे। कार्यशाला का सफल संचालन डॉ. गौरव कुमार और डॉ. दीपेश वर्मा ने किया।