सरदार पटेल संगठन का होली मिलन:लखनऊ में कवियों ने अपनी रचनाओं से बांधा समां

सरदार पटेल सामाजिक, साहित्यिक उत्थान संगठन (उत्तर प्रदेश) ने होली मिलन और अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला सभागार, हजरतगंज में संपन्न हुआ। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता इलाहाबाद के हास्य कवि डी.सी. पांडे ने की, जबकि बाराबंकी के हास्य कवि अजय प्रधान ने इसका संचालन किया। तहसील पत्रकार एसोसिएशन बीसलपुर के अध्यक्ष पातीराम गंगवार ने सभी कवियों को अंगवस्त्र, माल्यार्पण और बैज लगाकर सम्मानित किया। कवियों ने हास्य व्यंग्य रचनाएं पढ़ी कवि सम्मेलन में कवियों ने हास्य, व्यंग्य, प्रेम और जीवन के विभिन्न पहलुओं पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। डॉ. अलका अस्थाना ‘अमृत मयी’ ने होली पर आधारित कविता ‘कान्हा रंगि न डारो हमि पे…’ सुनाई, जिसकी श्रोताओं ने सराहना की। हास्य-व्यंग्य कवि चेतराम अज्ञानी ने अपनी पंक्तियों ‘मैं लिखता हूं ये मेरी मजबूरी है, स्वास्थ्य सही चाहो तो हंसना बहुत जरूरी है” से दर्शकों को खूब हंसाया। गिरगिट तो रंग बदलता है सुनाकर खूब तालिया बटोरी डॉ. सरिता सदाबहार ने संवेदनाओं से भरी कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं की तालियां बटोरीं। हास्य कवि गोबर गणेश ने बदलते समय और मानवीय स्वभाव पर व्यंग्य करते हुए कहा, ‘गिरगिट तो रंग बदलता है, परंतु मानव उससे भी महान हो गया।’ गीतकार डॉ. रेनू द्विवेदी ने प्रेम की भावनाओं से ओत-प्रोत रचना ‘आप ऐसे न देखो मुझे प्यार से…’ सुनाकर सभी का मन मोह लिया। हास्य कवि विजय तन्हा ने होली पर व्यंग्यात्मक कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं को गुदगुदाया। कार्यक्रम के संचालक अजय प्रधान ने भी अपनी पंक्तियों से खूब तालियां बटोरीं। उन्होंने कहा, एसी, पंखे, कूलर हों पर नीम की छांव जरूरी है, शहर में कितनी सुविधाएं हों लेकिन गांव जरूरी है।