गंगा किनारे बेस मोहब्बत और भोकाल से भरे शहर कानपुर की राजनीती भी मसालेदार रहती है। कभी कांग्रेस यहाँ अपना परचम लहराती है तो कभी सपा अपना वर्चस्व बनाने का दवा करती है जबकि 2017 के बाद कानपुर बीजेपी का पसंदीदा विधानसभा क्षेत्र रहा है। बीते दिनों में कानपुर की मिलों में बजने वाले सायरन से यहां पर सुबह और शाम का अंदाज लगाया जाता था।
महानगर कानपुर की सीमाओं के अंदर 10 बड़ी विधानसभाएं सम्मिलित है। जबकि 4 बड़ी विधानसभा कानपुर देहात के अंतर्गत आती है । यहाँ हर एक विधान सभा का अलग ही समीकरण देखने को मिलता है चाहे जो जातीय हो या सामुदायिक। देश की राजनीति की चर्चाएं यहाँ सुबह की चाय की टापरी से शुरू होकर रात की हाथ सिकाई होने तक चलती है। आइये जानते है अपने विधानसभा और उनके प्रत्याशियों को।
- बिल्हौर विधान सभा ( सीट न. 209)
लगभग 4 लाख वोटर्स की बिल्हौर विधान सभा कभी लोक सभा के अंतर्गत आती थी। 2009 के परिसीमन के बाद बिल्हौर का एक बड़ा हिस्सा अकबरपुर लोक सभा में चला गया था। बिल्हौर विधान सभा की प्राचीनता बहुत विख्यात है। यहाँ मंदिर मस्जिद इंजीनियरिंग कॉलेज स्कूल और बहुत से एग्रीकल्चर वेंचर्स मौजूद है।
2017 विधानसभा में यहाँ 5 उम्मीदवारों ने मुख्या दावा ठोका था जिसमे भगवती प्रसाद सागर (बीजेपी) ने अपने प्रतिद्वंदी बसपा के कमलेश चंद्र दिवाकर को हरा कर विधायकी काबिज़ की थी।
2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की रचना सिंह को 42,351 वोटो से हरा कर बीजेपी के राहुल बच्चा सोनकर बिल्हौर विधानसभा के विधायक घोषित किये गए।
2-बिठूर विधानसभा (सीट न. 210)
कानपुर की बिठूर विधानसभा सीट क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ी है | बिठूर क्षेत्र अपनी संस्कृति , गंगा किनारा ,ramayan से जुड़े कई आद्यात्मिक इतिहास सीता रसोई अदि के लिए प्रसिद्ध है | लगभग 4 लाख वोटर्स की विधान सभा में ओबीसी वोटरों की सबसे बड़ी आबादी है। इसके बाद जनरल और एससी वोटर है। मुस्लिम वोटरों की आबादी बेहद कम है।विधानसभा चुनाव 2012 में समाजवादी पार्टी के मुनींद्र शुक्ला ने जीत दर्ज की थी। वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के अभिजीत सिंह सांगा एसपी के मुनींद्र शुक्ला को हरा कर शानदार जीत दर्ज की थी।
एक बार फिर बीजेपी के परचम को लहराते हुए 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के मुनींद्र शुक्ल को 21’073 वोटो से हरा कर बीजेपी के अभिजीत सिंह सांगा बिठूर विधानसभा के विधायक घोषित किये गए।
03- कल्यानपुर विधानसभा (211) सीट
लगभग 3.5 लाख वोटर्स की कल्यानपुर विधानसभा सीट पहले कांग्रेसियों का गढ़ रही। इसके बाद इस सीट पर बीजेपी का कब्जा रहा। बीजेपी की प्रेमलता कटियार लगातार चार विधायक रही हैं। कल्यानपुर विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक ओबीसी वोटर रहते हैं। लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के सतीश निगम से चार की विधायक रहीं प्रेमलता कटियार हार गईं थी। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रेमलता कटियार की बेटी नीलिमा कटियार ने जीत दर्ज की ।
2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के सतीश निगम को 21’535 वोटो से हरा कर बीजेपी के नीलिमा कटियार कल्यानपुर विधानसभा में पुनः जीत दर्ज की ।
04- गोविंद नगर विधानसभा (212) सीट
गोविंद नगर विधानसभा सीट ब्राह्मण बाहुल क्षेत्र है बीते दो विधानसभा चुनावों में इस सीट पर बीजेपी का कब्जा रहा है। 2012 से 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सत्यदेव पचौरी ने बड़ी जीत हासिल की थी। वहीं 2017 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद सत्यदेव पचौरी को प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बनाया गया था। बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में सत्यदेव पचौरी को प्रत्याशी बनाया था। सत्यदेव पचौरी ने कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय कोयला मंत्री को हराकर सांसद बने थे। सत्यदेव पचौरी के सांसद बनने के बाद गोविंद नगर सीट पर विधानसभा उपचुनाव हुए थे। जिसमें बीजेपी के सुरेंद्र मैथानी ने जीत दर्ज की थी।
2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के सम्राट विकास को 80896 वोटो से हरा कर बीजेपी के सुरेंद्र मैथानी गोविंद नगर सीट पर बहुत अधिक वोटो के अंतर से जीत दर्ज की ।
05- सीसामऊ विधानसभा (213) सीट
लगभग 2.5 लाख वोटर्स कानपुर की सीसामऊ की विधानसभा सीट मुस्लिम बाहुल इलाका है। सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र में 70 फीसदी मुस्लिम आबादी रहती है। इस सीट पर समाजवादी पार्टी का दबदबा है। एसपी के इरफान सोलंकी ने 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज की थी।
2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सलिल विश्नोई को 12266 वोटो से हरा कर सपा के इरफ़ान सोलंकी सीसामऊ विधानसभा सीट में पुनः जीत दर्ज की ।
06- आर्यनगर विधानसभा (214) सीट
आर्यनगर विधानसभा सीट जनरल सीट है। आर्यनगर क्षेत्र में सबसे अधिक व्यापारियों के होने से इस सीट को व्यापारियों की सीट भी कहा जाता है। आर्यनगर क्षेत्र में यूपी की सबसे बड़ी कपड़़ा मार्केट है, बिरहाना रोड पर जूलरी की शॉप हैं, नौघड़ा की मार्केट है। इसे कानपुर की आर्थिक मंडी भी कहा जाता है। आर्यनगर में जनरल वोटरों की संख्या सबसे अधिक है। इसके साथ ही यहां पर मुस्लिम आबादी भी रहती है। आर्यनगर विधानसभा सीट से 2012 में बीजेपी के सलिल विश्नोई विधायक थे। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के अमिताभ वाजपेई ने शानदार जीत दर्ज की थी।
2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सुरेश अवस्थी को 7924 वोटो से हरा कर सपा के अमिताभ बाजपाई आर्यनगर विधानसभा सीट में पुनः जीत दर्ज की ।
07- किदवई नगर विधानसभा (215) सीट
किदवई नगर विधानसभा सीट ब्राह्मण बाहुल इलाका है। गोविंद नगर विधानसभा सीट को तोड़कर किदवई नगर विधानसभा सीट को बनाया गया था। विधानसभा चुनाव 2012 में कांग्रेस के अजय कपूर ने जीत दर्ज की थी। इससे पहले अजय कपूर गोविंद नगर विधानसभा सीट से दो बार विधायक रह चुके थे। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के महेश त्रिवेदी ने कांग्रेस के अजय कपूर को हरा कर कमल खिलाया था।
2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अजय कपूर को 37760 वोटो से हरा कर बीजेपी के महेश त्रिवेदी किदवई नगर विधानसभा के विधायक घोषित किये गए।
08- कैंट विधानसभा (216) सीट
कानपुर की कैंट विधानसभा सीट मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। कानपुर में सर्वाधिक मुस्लिम वोटर कैंट क्षेत्र में रहते हैं। मुस्लिम बाहुल सीट होने के बाद भी 2012 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के रघुनंदन सिंह भदौरिया ने जीत दर्ज की थी। वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सुहैल अंसारी ने शानदार जीत दर्ज की थी।
2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी रघुनंदन सिंह भदौरिया को 19987 वोटो से हरा कर सपा के मोहम्मद हसन रूमी कैंटविधानसभासीट से जीत दर्ज की ।
09- महाराजपुर विधानसभा (217) सीट
विधानसभा चुनाव 2012 में हुए परिसीमन के बाद महाराजपुर विधानसभा सीट अस्तित्व में आई थी। यह सीट पहले सरसौल विधानसभा सीट हुआ करती थी। महाराज विधानसभा सीट पर ओबीसी और जनरल वोटरों की संख्या सबसे अधिक हैं। इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है। महाराजपुर विधानसभा सीट से कैबिनेट मंत्री सतीश महाना विधायक हैं। सतीश महाना ने 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में कमल खिलाया था।
2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के फ़तेह बहादुर सिंह को 82261 वोटो से हरा कर बीजेपी केसतीश महाना महाराजपुर विधानसभा के विधायक घोषित किये गए।
10- घाटमपुर विधानसभा (218) सीट
कानपुर की घाटमपुर विधानसभा सीट पर ओबीसी और अनुसूचित जनजाति के वोटरों की संख्या सर्वाधिक है। 2012 के विधानसभा चुनाव में घाटमपुर सीट से एसपी के इंद्रजीत कोरी जीते थे। वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की कमलरानी वरूण जीती थीं। कमल रानी वरूण को प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। लेकिन कोरोना की पहली लहर में उनका निधन हो गया था। इसके बाद घाटमपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुए थे। जिसमें उपेंद्र पासवान ने शानदार जीत दर्ज की थी। कानपुर की सभी विधानसभा सीटों पर बेरोजगारी, खस्ताहाल सड़कें, गंदगी, पानी, सीवर भराव, की समस्याएं आम हैं। पिछले कई दशकों से लगातार सरकारें आती-जाती रहीं। लेकिन आम जनमानस की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।
2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के भगवती सागर को 14474 वोटो से हरा कर अपना दल के सरोज कुरील घाटमपुर विधानसभा के विधायक घोषित किये गए।