गोरखपुर के आसमान में आज रात साल का दूसरा सुपरमून यानी ‘बीवर मून’ साफ दिखाई दिया। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामंडल) के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर चांद पृथ्वी के सबसे करीब होने के कारण सामान्य से बड़ा, गोल और अपेक्षाकृत ज्यादा चमकदार दिखाई दिया। यह खगोलीय घटना नंगी आंखों से आसानी से देखी जा सकती थी। चांद का अवलोकन- समय और दिशा
स्थानीय समयानुसार चांद का उदय शाम 5:04 बजे पूर्व-उत्तरपूर्व दिशा से हुआ। रात 12:19 बजे यह अपने चरम बिंदु पर पहुंचा, जब यह पूरी तरह गोल और चमकदार नजर आया। इसके बाद सुबह 5:28 बजे पश्चिम-उत्तरपश्चिम दिशा में डूब गया। अमर पाल सिंह ने बताया कि इस दौरान मौसम साफ रहने की वजह से शहर के सभी हिस्सों से यह नज़ारा स्पष्ट रूप से देखा जा सका। ‘बीवर मून’ का महत्व
अमर पाल सिंह ने बताया कि प्रत्येक पूर्णिमा का पारंपरिक नाम होता है। नवंबर की पूर्णिमा को ‘बीवर मून’ कहा जाता है। यह नाम उत्तर अमेरिका की पुरानी परंपरा से आया है, जब इस मौसम में लोग बीवर नामक जानवर के फर के लिए जाल लगाते थे। इसे कभी-कभी ‘हंटर मून’ भी कहा जाता है। चांद के उदय के समय यह हल्के नारंगी रंग और बड़ा दिखाई देता है, जो देखने में अत्यंत आकर्षक लगता है। आधी रात के समय, जब यह आसमान के बीचोंबीच होता है, तब इसकी चमक अपने चरम पर होती है। गोरखपुर और आसपास के क्षेत्र के लोगों ने इस प्राकृतिक दृश्य का भरपूर आनंद लिया। अगला सुपरमून 4 दिसंबर को
इस साल का अगला सुपरमून 4 दिसंबर 2025 को नजर आएगा। खगोलविदों ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षित स्थान से ही इस खगोलीय नज़ारे का अवलोकन करें और इसे मोबाइल या कैमरे में कैद कर सकते हैं।